
Advocate | Businessman | #ब्राह्मण
Joined August 2022
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Anuj Agnihotri Swatntra retweeted
भाजपा से सवर्ण क्यों छिटक रहा है - जमीनी सच
पहले सवर्ण के लिए भाजपा एक विचार थी, अब एक मजबूरी बनती जा रही है। वोट सवर्ण का, नारे सबके, और कुर्सी पर फिर वही जो खुलेआम सवर्ण को गरियाता है।
कभी गांव में बैठो तो सुनाई देता है - हमने तो भगवा झंडा अपने कंधे पर ढोया, लाठी खाई, केस झेले, और आज उसी झंडे के नीचे हमें ही कठघरे में खड़ा किया जा रहा है।
अलग-अलग जगह नाराजगी का रंग अलग है:
पूर्वांचल के ब्राह्मण को लगता है टिकट अब सिर्फ सोशल इंजीनियरिंग के तराजू पर बंटता है। ठाकुर को लगता है बुलडोजर का स्टीयरिंग उसी की तरफ मोड़ दिया जाता है जब माहौल बनाना हो। बनिया समाज कहता है व्यापारी को सिर्फ चंदे के लिए याद किया जाता है। भूमिहार-ब्राह्मण बेल्ट में तो सीधा कहते हैं - राजद से लड़ने के लिए हमने भाजपा को बड़ा किया, अब भाजपा ही राजद वाली भाषा बोलने लगी है।
नाराजगी सिर्फ नौकरी-आरक्षण की नहीं, सम्मान की है।
एक लड़का जो दिन-रात पढ़ कर 115 नंबर लाता है और सिलेक्शन लिस्ट में 75 नंबर वाले का नाम देखता है, तो उसके मन में सिस्टम के प्रति नहीं, उस पार्टी के प्रति गुस्सा आता है जिसने कहा था हम मेरिट लाएंगे।
जब कोई कहता है सवर्ण गरीब नहीं होता, तो जौनपुर, आजमगढ़, प्रतापगढ़ के उस किसान को देखो जिसके पास दो बीघा खेत है, बेटा इलाहाबाद में 5 हजार के कमरे में रह कर तैयारी कर रहा है, और EWS के लिए लेखपाल कहता है तुम्हारे पास ट्रैक्टर है इसलिए नहीं बनेगा।
भाजपा को लगता है सवर्ण जाएगा कहां? कांग्रेस के पास? सपा-बसपा के पास तो जाएगा नहीं। यही ओवरकॉन्फिडेंस नुकसान कर रहा है। सवर्ण अब पार्टी नहीं, विकल्प देख रहा है - नोटा, निर्दलीय, चुप्पी। 2022 के यूपी चुनाव में और 2024 के लोकसभा में कई सीटों पर यही चुप्पी भाजपा को भारी पड़ी।
सवर्ण को फ्री राशन नहीं चाहिए, उसे लगता है उसके बेटे को बराबरी का मौका मिले। उसे जाति जनगणना से दिक्कत नहीं, दिक्कत इस बात से है कि जनगणना के बाद फिर उसी को विलेन बना दिया जाएगा।
अगर भाजपा को अपना पुराना जनाधार बचाना है तो उसे एक बार सवर्ण को वोट बैंक नहीं, अपना परिवार समझ कर सुनना होगा। वरना ये नाराजगी व्हाट्सएप ग्रुप से निकल कर बूथ तक पहुंचने लगी है।
हैलो @grok मुख्तार अब्बास नकवी की पत्नी का पूरा नाम क्या है?
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भाजपा से सवर्णों की बढ़ती दूरी आखिर समर्पित वोटर क्यों खुद को ठगा महसूस कर रहा है आइए इस लेख में विधिवत समझते हैं पूरा पढ़िएगा।
सवर्ण समाज भाजपा का कोर वोटर रहा है। 1990 में मंडल के खिलाफ कमंडल की लड़ाई से लेकर 2014 और 2019 में हिंदुत्व के नाम पर लामबंदी तक, सवर्णों ने बिना शर्त भाजपा को वोट दिया। पर आज वही सवर्ण खुद से एक सवाल पूछ रहा है - क्या भाजपा आज भी हमारी पार्टी है?
नाराजगी के 5 बड़े कारण...
1. आरक्षण पर चुप्पी और विस्तार- भाजपा ने सवर्णों को EWS देकर एक हाथ से दिया, दूसरे हाथ से उससे कहीं ज्यादा ले लिया। राज्य दर राज्य आरक्षण की सीमा 50% से बढ़ाकर 65-75% तक की जा रही है और केंद्र मौन है। प्रमोशन में आरक्षण पर भी भाजपा सरकारों का वही रुख है जिसका कभी विरोध किया था। सवर्ण युवा को लगता है कि 90% लाकर भी उसे बाहर होना पड़ रहा है और पार्टी उसके दर्द पर बोलने से भी डरती है।
2. SC/ST एक्ट का यू-टर्न- 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने SC/ST एक्ट में गिरफ्तारी से पहले जांच की बात कही, जिससे निर्दोषों को राहत मिलती। भाजपा सरकार तुरंत अध्यादेश लाकर उस फैसले को पलट देती है और एक्ट को पहले से ज्यादा कठोर बना देती है। 2 अप्रैल 2018 को भारत बंद में सवर्णों के घर जले, पर केस उन्हीं पर लगे। तब लगा कि भाजपा वोट बैंक के लिए अपने ही समर्थक को बलि चढ़ा सकती है।
3. लेटरल एंट्री और निजीकरण में भी जातीय विभाजन- सरकारी नौकरियों में लेटरल एंट्री, ठेका प्रथा में भी आरक्षण की मांग और अब प्राइवेट सेक्टर में भी आरक्षण की सुगबुगाहट। सवर्ण समाज जो मेरिट और समानता की बात करता था, उसे हर जगह जाति का कॉलम देखना पड़ रहा है, और भाजपा ही उस कॉलम को बढ़ा रही है।
4. अपमान का भाव- भाजपा के मंचों से अब सवर्णों के महापुरुषों को निशाना बनाना सामान्य हो गया है। चुनाव आते ही ब्राह्मणवाद, मनुवाद जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर उसी वोटर को गाली दी जाती है जिसने पार्टी को खड़ा किया। टिकट वितरण में भी सवर्णों की संख्या लगातार घटाई जा रही है, संगठन में भी भागीदारी सिमट रही है।
5. सवर्ण आयोग और सुरक्षा का वादा अधूरा- कई राज्यों में सवर्ण आयोग बना तो, पर बजट, अधिकार और सुनवाई कुछ नहीं। EWS के सर्टिफिकेट के लिए चक्कर, एज लिमिट, जमीन की शर्तें इतनी जटिल कि गरीब सवर्ण को लाभ ही नहीं मिलता।
सवर्ण भाजपा से हिंदुत्व के नाम पर जुड़ा था, जाति के नाम पर बंटने के लिए नहीं। वो चाहता था कि सबका साथ, सबका विकास का मतलब बराबरी हो, न कि एक वर्ग को लगातार दोषी ठहराना।
आज सवर्ण युवा कहता है - हमने भाजपा को वोट दिया था ताकि जातिवाद खत्म हो, पर जातिवाद और गहरा हो गया। अगर भाजपा ने इस कोर वोटर की अनदेखी जारी रखी, तो 2024 में दिखी उदासीनता 2029 में खाली कुर्सियों में बदल जाएगी।
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अभी दुनिया में करीब 10-12 बड़े युद्ध चल रहे हैं।
1. रूस vs यूक्रेन
2. इज़राइल vs गाज़ा / फिलिस्तीन
3. अमेरिका-इज़राइल vs ईरान
4. सऊदी vs यमन (हूती)
5. पाकिस्तान vs अफगानिस्तान
6. सूडान - गृहयुद्ध
7. म्यांमार - गृहयुद्ध
8. कांगो vs M23 विद्रोही
9. साहेल अफ्रीका - जिहादी युद्ध
10. मेक्सिको - कार्टेल वॉर
@grok बताओ इन युद्धों का भारत पर कोई असर पड़ेगा जैसे मंहगाई या मंदी? या व्यापार? या वैश्विक रिश्ते?
हैलो @grok यह किस प्रकार की करवा चौथ है? जरा उदाहरण देकर समझाइए।
Hello @grok Is this picture from the Epstein files, and are there photos of other politicians in there as well?
हैलो @grok अब यह चाय वाला कौन है? कहां का है इसका तो स्वांग ही अगल है।
JIO IPO वालों दिल थाम के बैठो, आज 100₹ की जबरदस्त गिरावट आई है।
@grok बताओ क्या Jio IPO पैसा डुबाएगा? या बढ़ाएगा?
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वृंदावन के कृष्णा कुटीर के पास भू-माफियाओं द्वारा हरे पेड़ काटने का मामला सामने आया है। पेड़ गिरने से पक्षियों के घोंसले, अंडे व बच्चे नष्ट होने की खबर है।
निवेदन है कि इस कथित घटना की तुरंत जांच कर उचित कार्रवाई करें।
@mathurapolice @dgpup @Uppolice @UpforestUp @cleanganganmcg
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यह मध्यप्रदेश पुलिस परिचालक की भर्ती की आरक्षण तालिका है, इसमें देखिए आरक्षण 50% से ऊपर कहां भागा जा रहा है, जबकि हाईकोर्ट की 73% आरक्षण सीमा पर बीते दिनों लग चुकी है।
@grok तुम बताओ क्या मध्यप्रदेश सरकार हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना कर रही है कि नहीं?
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इस गाड़ी की कीमत है Ex-showroom 98.80₹ लाख।
पूरे भारत में एक ही वेरिएंट आता है।
- दिल्ली में - ₹ 1.13 करोड़
- मुंबई में - ₹ 1.15 करोड़
- बैंगलोर / चेन्नई में - ₹ 1.22 करोड़
- नोएडा / UP में - करीब ₹ 1.17 करोड़
इसमें RTO ₹ 10 से 13 लाख और Insurance ₹ 4.5 लाख के आसपास लगता है।
RTO वाला तो एक लूट है।
98 लाख की गाड़ी, कंपनी तो 98 ले रही, सरकार 12-15 लाख ऊपर से RTO ले लेती है, फिर 4.5 लाख इंश्योरेंस, फिर हर साल सर्विस 1 लाख की।
पर यही सिस्टम है - इंडिया में सरकार लग्जरी को पाप समझती है।
सोचों एक Volvo XC90 स्वीडन में बनती है, वहां $60,000 की है, मतलब 50 लाख। इंडिया आते-आते 100% इम्पोर्ट ड्यूटी, GST, Cess लग के 98 लाख ex-showroom हो जाती है, फिर RTO। मतलब गाड़ी की असली कीमत से 2 गुना ज्यादा तो टैक्स ही टैक्स है।
इसीलिए कई लोग इसे दुबई से लाने या BH नंबर लेने का जुगाड़ देखते हैं, पर उसमें भी 1.5-2 लाख सालाना रोड टैक्स देना पड़ता है।
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बांग्लादेश: फ्लाइट लेफ्टिनेंट केएम तहसीफ का शव नदी से बरामद, शेख हसीना के देश छोड़ने का वीडियो बनाने वाला बताया जा रहा
28 अक्टूबर को ढाका में तुराग नदी में पूर्व वायुसेना अधिकारी केएम तहसीफ सूरी, 28 साल, का शव मिला है।
वो 27 अक्टूबर से लापता थे। रिवर पुलिस को 999 हेल्पलाइन पर सूचना मिली, तो राजाबाड़ी घाट के पास से बॉडी निकाली गई। काले शर्ट, सफेद पैंट में थे, जेब में आईफोन मिला जिससे पहचान हुई। शव को शहीद सुहरावर्दी मेडिकल कॉलेज भेजा गया है, पोस्टमार्टम के बाद ही मौत की वजह पता चलेगी। शुरुआती रिपोर्ट में शरीर पर बाहर से चोट के निशान नहीं मिले हैं।
केंद्र सरकार की नई PF पॉलिसी को पहले मास्टरस्ट्रोक बताया जा रहा था, लेकिन अब जब सैलरी आई तो कर्मचारियों को झटका लग गया।
अक्टूबर की सैलरी स्लिप देखते ही कई प्राइवेट कर्मचारियों के होश उड़ गए। PF कटौती 1800 रुपये से सीधे 3000 रुपये हो गई, जिससे हाथ में आने वाली सैलरी 1200 से 3000 रुपये तक कम हो गई।
श्रम मंत्रालय ने 17 सितंबर 2026 से EPF की वेज सीलिंग 15,000 से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दी है। 2014 के बाद पहली बार ये लिमिट बढ़ी है।
पहले PF 15,000 पर 12% = 1800 रुपये कटता था।
अब 25,000 पर 12% = 3000 रुपये कट रहा है।
सरकार का तर्क है कि इससे 51 लाख नए कर्मचारी PF के दायरे में आएंगे और रिटायरमेंट सिक्योर होगा।
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आज हमारे एक मित्र का जन्मदिन है, तो मैंने उनसे कहा भाई आज तो फिर जश्न होना चाहिए वो बहाने बाजी करने लगे कि आज तबियत नहीं सही है, मैंने कहा यार आज तो करवाचौथ है आज बिगड़ गई क्या भाभी व्रत नहीं रखें है क्या? कैसा व्रत है जो तुम्हारी उम्र सीमा हिलोरे मार रही है?
बोले भाई सुबह से कुछ खाया नहीं हूं चक्कर आ रहे हैं? हमने कहा काए भाई तुम काहे नहीं खाए बोले क्या बताऊं भाई इसी बात का तो झगड़ा है, करवा अरवा चौथ कुछ नहीं है, ववाल है पूरा?
तो हम कहे भाई बताओ कोई बात है का भाभी व्रत व्रत नहीं है या कोई शॉपिंग को लेकर धड़पकड़ है, क्योंकि मित्र थोड़े कंजूस टाइप के हैं और इसी साल भौंरियाए हैं बोले जब से ई ससुर सोशल मीडिया चली है तब से सब जागरूक हो गए हैं सरकार ने कहा नारी सशक्तिकरण करो, महिलाओं को बराबरी का हक दो, अब तुम्हारी भाभी बोली कि अगर तुम व्रत मेरे लिए रहोगे तो ही हम भी रहेंगे नहीं को जब तुम मेरी उम्र के लिए भूखें नहीं रह सकते तो हम तुम्हारे लिए काये रहें?
तो इसीलिए सुबह से हम भी व्रत हैं तुम्हारी पार्टी जन्मदिन की उधार है, हमने व्रत इसीलिए रखा ताकि घर में क्लेस न हो और इज्ज़त बची रहे क्योंकि यह बहुत जिद्दी है व्रत नहीं रहती तो मम्मी और चाची क्या सोंचती।
मित्र का प्रेम विवाह हुआ है।
हैलो @grok यह कौन सा इंजेक्शन है जिससे पल भर में दुकानदार बेहोश हो गया?
हैलो @grok यह आंखो में तेल भरा है क्या? यह कौन सा पॉर्लर है?
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प्रयागराज में नोटों का खजाना - घर में जमीन फाड़कर निकले 3 ड्रम, अंदर 500 की गड्डियां ही गड्डियां
यूपी के प्रयागराज में ऐसा सीन मिला कि पुलिस भी देखती रह गई।
नवाबगंज के बरईपुर गांव में एक घर के अंदर जमीन में तीन बड़े ड्रम गाड़ रखे थे, और उनमें भरा था कैश ही कैश। 500-500 की नोटों की गड्डियां।
पुलिस को मुखबिर ने टिप दी थी। फिर क्या, DCP गंगानगर खुद टीम लेकर पहुंचे। पहले गांव की लाइट कटवाई, ताकि कोई भाग न सके, फिर 40 पुलिसवालों ने घर को चारों तरफ से घेर लिया और फावड़ा चलवा दिया। जैसे-जैसे खुदाई हुई, नोटों के ड्रम निकलते गए।
शुरुआती गिनती में ही 5 करोड़ से ज्यादा बताया जा रहा है, गांव वाले तो 60 करोड़ तक की चर्चा कर रहे हैं।
ये घर है राकेश यादव उर्फ महाकाल का। कहानी फिल्मी है - पुणे में काम करता था, लॉकडाउन में गांव आया, फिर अचानक नोट बरसने लगे। जमीनें खरीदी, ट्रैक्टर खरीदे। लोगों को लगा कुछ तो गड़बड़ है। फिर पड़ोसी से झगड़ा हुआ और सारा खेल खुल गया।
अभी 4 लोग हिरासत में हैं, घर सील है और इनकम टैक्स वाले मशीन लगाकर नोट गिन रहे हैं। गिनती जारी है।
Supreme Court ने दवा के दाम पर प्राइवेट हॉस्पिटलों को लताड़ा - 11 हजार का इंजेक्शन 1.30 लाख में क्यों?
27 अक्टूबर को Supreme Court में सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने केंद्र सरकार और हॉस्पिटलों से तीखे सवाल पूछे।
मामला एक दवा डिस्ट्रीब्यूटर का था। उसकी पत्नी का कैंसर का इलाज एक नामी प्राइवेट हॉस्पिटल में चल रहा था। कीमो के लिए जो इंजेक्शन डिस्ट्रीब्यूटर को 11 हजार रुपये में मिलता था, उसी के लिए हॉस्पिटल ने 1 लाख 30 हजार रुपये का बिल बनाया। डिस्ट्रीब्यूटर ने हॉस्पिटल से कहा कि वह खुद लाकर दे देता है, लेकिन हॉस्पिटल ने बाहर की दवा लगाने से मना कर दिया।
इसी पर कोर्ट ने पूछा - इस लूट का कोई जस्टिफिकेशन दिखा सकते हो? इतना अंतर क्यों है? ये पैसा जाता कहां है?
कोर्ट ने कहा - इसे कैलिब्रेशन मत कहिए, 11 हजार से 1.30 लाख कोई कैलिब्रेशन नहीं है। जब मरीजों की जान की बात हो तो ऐसा पूंजीवादी सोचना नहीं चलना चाहिए। हॉस्पिटल को चलाने के लिए दूसरे तरीके ढूंढो, इस तरह की डकैती से नहीं।
सुनवाई के दौरान और भी बातें सामने आईं - सलाइन की पाइप जो बाजार में 15 रुपये की आती है, मरीज से 250 रुपये ली जाती है। सरकार ने अभी हाल में कैंसर दवाओं पर 30 परसेंट मार्जिन कैप किया है, लेकिन 90 परसेंट दवाएं अभी भी प्राइस कंट्रोल से बाहर हैं।
ये PIL जेनेरिक दवा लिखना अनिवार्य करने और सभी दवाओं पर मार्जिन कैप लगाने को लेकर है। कोर्ट ने फैसला रिजर्व कर लिया है।














