डाका तो नहीं, डाला!
चोरी तो नहीं, की है,
हंगामा है, क्यूँ, बरपा,
कुछ ज्यादा जो, पी ली है!! – at New Delhi, India
ममता दी ने, कल प्रदर्शन के समय अपने कार्य कर्ता को झापड़ रसीद कर दिया।
बेचारा उनके लिए, रास्ता बना रहा था, सुरक्षित निकालने का मार्ग।
खिसियानी बिल्ली खम्बा नोचे,
जो मर्ज़ी, जिसकी वो, सोचे!
हार का दर्द कहीं, इनकी मानसिक संतुलन न बिगाड़ दे।
अनपेक्षित, हर कार्य कर रही है, आज कल।।
। – at Delhi, India
ओवैसी साब की साफगोई का कायल उनके विरोधी भी है!
उनकी बातों मे सारगर्भित आंकड़ो और तार्किक योग्यता झलकता है! उनकी इल्म और जानकारी कबीले गौर और तारीफ के लायक है! चाहे लाख शिकायते हो, उन्हे सत्ता से, मगर जरूरत के वक़्त, और मुल्क की बेहतरी के लिए वो सियासत को छोड़ उपलव्ध रहे है!
चाहे सिंदूर operation हो, या कोई भी राष्ट्र हित, उन्होंने सदा इस मुल्क का सर ऊँचा किया है।।
बस, एक खलिस है, जब उनकी शख्सियत का एहतराम हर वर्ग करता हो, तो वो सिर्फ एक खास कौम तक ही क्यों सिमट के रहे!. उनको मुखर रूप से हर मुद्दे और संप्रदाय के लिए आगे आना चाहिए।
ऐसे जहीन और मुखर लोगो की आज इस मुल्क को बहुत जरूरत है।
उम्मीद है, गौर फरमाएंगे।।
@asadowaisi – at Delhi, India













