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“सर्वे भवन्तु सुखिनः” समानता, सद्भाव और मानव-मर्यादा के मूल्यों के प्रति समर्पित। 🌳खाटी झारखंडी🌳
Jharkhand, India
Joined December 2017
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झारखंड सरकार युवाओं के मौत से खेलना बंद करे। भादो मास की कड़ी गर्मी में आप युवाओं को 10 KM दौड़ा रहें हैं। हर दिन कई युवा बेहोश होकर गिर रहे है,कई युवा भाई दुनिया छोड़ गए। चुनाव नज़दीक आने पर आनन फानन में युवाओं को नौकरी की जगह मौत दे रही है झारखंड सरकार।
#झारखंड_उत्पाद_सिपाही
संघर्ष और स्वावलंबन की इस खूबसूरत तस्वीर को सलाम!
साड़ी के पल्लू को कसकर बाँधकर मैदान में उतरीं ये बहन सिर्फ 1600 मीटर की दौड़ नहीं लगा रहीं, बल्कि समाज की बंदिशों को पीछे छोड़कर अपने आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही हैं। @HemantSorenJMM @JMMKalpanaSoren #RAMGARH
रामगढ़ जिला में होमगार्ड की बहाली होनी है। उससे पहले एकेडमी की ओर से 1600 मीटर दौड़ का ट्राइल हुआ। उसमें कई ऐसी महिलायें शामिल हुई जो साड़ी पहनकर दौड़ी। उसी में से एक ये हैं। 284 पदों के लिए होने वाली ये बहाली रामगढ़ जिला में 24 अक्टूबर से 5 नवम्बर तक होनी है। इसमें महिलाओं के लिए 50 फीसदी सीट आरक्षित है साथ विधवा और तलाकशुदा महिला के लिए अलग से 5 प्रतिशत आरक्षण है।
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अगर CID की जांच ने परीक्षा की integrity पर गंभीर सवाल उठाए हैं, तो उन findings को public domain में नहीं तो कम-से-कम माननीय न्यायालय के समक्ष जरूर रखा जाना चाहिए।
बंद लिफाफे में सही, लेकिन तथ्य अदालत तक पहुंचने चाहिए।
#submitcidnote #submitcancellationmemo
हमारी समृद्ध संस्कृति और पराक्रम का भव्य प्रतीक!
छत्रपति संभाजी महाराज की प्रतिमा 'स्टैच्यू ऑफ हिंदूभूषण' को नमन करते हुए 4,112 ढोल-ताशा वादकों ने एक साथ गूंज पैदा कर रचा नया वर्ल्ड रिकॉर्ड।
हर भारतीय के लिए अत्यंत गर्व का क्षण!"
#छत्रपति_संभाजी_महाराज #Pune #गिनीज_वर्ल्ड
आज़ादी के 78 साल बाद भी ‘दउरी’ पर टिकी ज़िंदगी!
पक्की सड़क न होने से गर्भवती महिला को दउरी में टांगकर लाना पड़ा।🤔
क्या इंसान की जान की कोई कीमत नहीं? @HemantSorenJMM @yourBabulal @MrityunjayS7 @narendramodi
@IrfanAnsariMLA @PTI_News
#JharkhandNews #Gumla #SystemFailure
सड़क नहीं तो सहारा ही सही! गर्भवती को दउरी में बैठाकर मुख्य सड़क तक लाए ग्रामीण।।
गुमला। घाघरा प्रखंड की कुहीपाट पंचायत के गुनिया गांव में सड़क की हालत इतनी खराब हो गई है कि एक गर्भवती महिला को अस्पताल या वाहन तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को दउरी में बैठाकर मुख्य सड़क तक लाना पड़ा।
#Jharkhand #Gumla
जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ! 🎉🎂
ईश्वर आपको उत्तम स्वास्थ्य, लंबी उम्र और ढेर सारी खुशियाँ दे। आप सदैव मुस्कुराते रहें और सफलता प्राप्त करें।🙏
यूँ तो मैं अपने जन्मदिन पर कोई विशेष आयोजन नहीं करता। मेरे लिये यह दिन भी सामान्य दिनों की तरह पूजा-पाठ, हनुमान जी के मंदिर में दर्शन, शत्रुओं से रक्षा और जीवन में यशस्वी होने का आशीर्वाद माँगने का ही दिन होता है।
जहाँ भी रहता हूँ, रोज़ की तरह नियमित भोजन, लिखने-पढ़ने और अपने काम में ही समय बीतता है। अब उम्र और अनुभव ने इतना तो सिखा ही दिया है कि भीड़ हमेशा अपनापन नहीं होती। समय, स्वार्थ और जरूरत के साथ लोगों के बदलते चेहरे देखकर अब बधाई देने वालों की संख्या भले सीमित हो गई हो, लेकिन जो लोग दिल से जुड़े हैं, वे आज भी बहुत मूल्यवान हैं।
फिर भी जिन शुभेच्छुओं ने फोन, मोबाइल या सोशल मीडिया के माध्यम से जन्मदिन की बधाई दी, उन सभी का हृदय से आभार। ईश्वर आप सभी को लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और यशस्वी जीवन प्रदान करें। मेरी ओर से आप सभी को शुभकामनाएँ।
और हाँ, कुछ भावनात्मक अवसरवादियों के लिये एक छोटी-सी नसीहत भी है। जन्मदिन पर भेजी गई औपचारिक बधाई से रिश्ते जीवित नहीं होते। रिश्ते तब पहचाने जाते हैं जब समय खराब हो, जब जरूरत हो, जब भीड़ छँट जाए और जब लाभ की संभावना शून्य हो।
जो लोग सुविधा देखकर अपनापन दिखाते हैं और परिस्थिति बदलते ही चेहरा बदल लेते हैं, उन्हें कम-से-कम शुभकामनाओं के दिन अभिनय थोड़ा कम करना चाहिए। क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ इंसान के बाल ही सफेद नहीं होते, उसकी पहचानने की दृष्टि भी तेज हो जाती है।
आज बस इतना ही….॥॥
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पावर के नशे में चूर कुछ सुविधा भोगी अधिकारियों की न कोई जाति होती है, न धर्म, न मर्यादा और न ही कोई स्थायी सिद्धांत।
इनका एक ही धर्म होता है, मौका।
एक ही जाति होती है, सत्ता।
और एक ही चरित्र होता है, सुविधानुसार रंग बदलना।
जब कमाई का भूत सिर पर सवार होता है, जब मलाईदार कुर्सी चाहिए होती है, जब “पावरफुल पद” की भूख लगती है, तब ये लोग जाति, धर्म, समाज, रिश्ते, मर्यादा सब भूल जाते हैं। तब इन्हें न अपना याद रहता है, न पराया। लेकिन जैसे ही खुद पर बन आती है, वैसे ही जाति, धर्म, अपमान, भावनाएँ, रिश्ते और सहानुभूति का झंडा लेकर इमोशनल ब्लैकमेलिंग शुरू कर देते हैं।
मेरी आदत नहीं है कि जीवन के अनौपचारिक पलों के खट्टे-मीठे अनुभवों को सार्वजनिक करता फिरूँ। बहुत कुछ देखा है, बहुत कुछ सुना है और बहुत कुछ झेला भी है। लेकिन यदि अति उत्साही लोग बार-बार मेरे मुँह में उंगली डालने की कोशिश करेंगे, तो मजबूरन मुझे भी अपने उसूलों की लक्ष्मण रेखा लाँघनी पड़ सकती है।
और सच कहूँ, अगर मैं अपने अनुभव और आपबीती को हूबहू शब्दों में बयान करने बैठ गया, तो आज भी सेवा में बैठे कई बड़े-बड़े महानुभावों और कुछ रिटायर्ड चेहरों के लिए समाज में सिर उठाकर चलना मुश्किल हो जाएगा।
कई चेहरे ऐसे हैं जो दिन में कुछ और होते हैं, रात में कुछ और। दिखते कुछ हैं, करते कुछ हैं। सिद्धांतों की बात करते हैं, लेकिन सुविधा देखकर चरित्र बदल लेते हैं। हिरण की खाल ओढ़े ऐसे लोगों के चेहरे से मुखौटा उतर गया, तो उनकी असलियत देखकर बहुतों की आंखें खुल जाएंगी।
इसलिए बेहतर है कि लोग मर्यादा में रहें।
क्योंकि हर चुप्पी कमजोरी नहीं होती।
कुछ चुप्पियाँ संस्कार बचाती हैं, और कुछ चुप्पियाँ कई चेहरों की इज़्ज़त बचाए रखती हैं।
#PowerDrunkOfficers
#SattaKaNasha
#SuwidhaBhogiAdhikari
#RangBadalteChehre
#MukhautaUtarnaBaakiHai
#JharkhandPolitics
#Bureaucracy
#PublicAccountability
#TruthWillComeOut
#SunilTiwari
सालों तक दिन-रात मेहनत करके पढ़ाई करने वाले अभ्यर्थियों को अब समझ आ गया होगा कि CGL परीक्षा पास करने का असली सीक्रेट फॉर्मूला क्या था!
* लाखों रुपये दो!
* दुगधा के सेफ हाउस पहुँचो!
* आराम से उत्तर रटो और अफ़सर बन जाओ!
और छात्र बेवकूफों की तरह किताबें चाटते रह गए!
#JSSC_CGL
न नियम का डर, न लीज का झंझट!
अगर रोजगार ढूंढ रहे हैं तो डिग्री छोड़िए, एक ट्रैक्टर खरीदिए और बालू का धंधा शुरू कर दीजिए!
अवैध खनन पर NGT की रोक भी बेअसर है!
रोज लाखों का कारोबार जारी है, और प्रशासन चैन की नींद सो रहा है। @HemantSorenJMM @GiridihDc
@yourBabulal @MrityunjayS7
101 साल पुराना इतिहास, आज अपनी पहचान को तरस रहा!
महात्मा गांधी जी ने गिरिडीह के जमुआ में जिस चबूतरे से आजादी का बिगुल फूंका था और जहां महिलाओं ने स्वतंत्रता के लिए अपने गहने तक दान कर दिए थे, आज वही ऐतिहासिक गांधी चबूतरा उपेक्षा का शिकार है। @HemantSorenJMM @GiridihDc
रखरखाव की कमी, अवैध अतिक्रमण और निर्माण के कारण यह ऐतिहासिक स्थल लगातार सिमटता जा रहा है।
क्या हमारी धरोहरों का यही हश्र होना चाहिए?
ग्रामीणों की मांग है कि इस स्थल को तुरंत अतिक्रमण मुक्त कराया जाए और बाउंड्री का निर्माण कर इसे ऐतिहासिक धरोहर घोषित किया जाए। #MahatmaGandhi
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फ़ेसबुक के पन्ने पलट रहा था, तो इस पोस्ट पर नज़र गई। सोचा, थोड़ी पुरानी यादें ताज़ा कर दूँ।
झारखंड की पुलिस क्या-क्या कर सकती है, इसका यह मामला एक डरावना नमूना है। गूगल बाबा के सौजन्य से कुछ पुरानी रिपोर्टें फिर सामने रख रहा हूँ।
मामला डॉ. इंतज़ार अली का है। 20 अगस्त 2015 को राँची के हिंदपीढ़ी निवासी डॉ. इंतज़ार अली को बर्द्धमान-हटिया पैसेंजर ट्रेन से “आतंकवादी” होने के संदेह में गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने दावा किया था कि उनके पास से विस्फोटक बरामद हुए हैं। उस समय यह मामला देश-दुनिया की सुर्खियों में गया।
लेकिन बाद में तस्वीर बदल गई।
रिपोर्टों के मुताबिक, जाँच में इंतज़ार अली के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिला। वे लगभग 54-55 दिन जेल में रहने के बाद जमानत पर बाहर आए। बाद की रिपोर्टों में यह बात सामने आई कि मामला पूरी तरह संदिग्ध था उन्हें फँसाने की साजिश पुलिस वालों ने मिलकर सिर्फ़ अपने समय पुर्व प्रोमोशन और पुरूस्कार के लिये किया था।
इस पूरे प्रकरण में मेरी व्यक्तिगत भूमिका भी रही। मुझे एक केंद्रीय सेवा के वरिष्ठ अधिकारी से यह गंभीर जानकारी मिली कि इंतज़ार अली कोई आतंकी नहीं, बल्कि एक साधारण यूनानी प्रैक्टिशनर हैं। उन्हें गलत तरीके से आतंकवादी बनाकर पेश किया जा रहा है और इस पूरे खेल के पीछे प्रमोशन, पुरस्कार और वाहवाही का लालच हो सकता है।
यह जानकारी मिलते ही मैंने पूरी गंभीरता से यह विषय आदरणीय बाबूलाल मरांडी जी के संज्ञान में रखा। बाबूलाल जी ने भी इसे हल्के में नहीं लिया। उन्होंने इस मामले की सच्चाई सामने लाने में गंभीर रुचि दिखाई। उसके बाद इस प्रकरण पर सवाल तेज हुए, परतें खुलीं और अंततः इंतज़ार अली की जान तथा जिंदगी बच सकी।
वरना सोचिए, झूठे सबूतों, गढ़ी हुई कहानी और वर्दी की ताकत के सहारे एक निर्दोष आदमी को आतंकवादी साबित कर दिया जाता, तो उसका अंजाम क्या होता? शायद वह आदमी जिंदगी भर जेल में सड़ता, या उससे भी भयावह स्थिति में फाँसी के फंदे तक पहुँचा दिया जाता।
अब इसी पृष्ठभूमि में अनुराग गुप्ता जैसे अधिकारियों के पूरे सेवाकाल को देखिए। उनके नाम से जुड़े विवादों, आरोपों और प्रकरणों को खंगालिए। जो कुछ गूगल पर उपलब्ध है, वही बहुत कुछ बताने के लिए काफी है। और जो पुराने दौर के मामले हैं, जब न इंटरनेट था, न मोबाइल, न डिजिटल रिकॉर्ड, उनका तो हिसाब शायद कभी सामने ही नहीं आया।
हैरानी तब होती है जब ऐसे अधिकारी, जिनके नाम के साथ बार-बार विवाद, सत्ता-समीकरण, दबाव, पद का दुरुपयोग और संवेदनशील मामलों में भूमिका के सवाल जुड़ते रहे हों, वे अपनी गर्दन फँसते ही जाति, धर्म, ईमानदारी और त्याग की चादर ओढ़ने लगते हैं।
सवाल व्यक्ति-विशेष का नहीं है। सवाल व्यवस्था का है।
अगर इंतज़ार अली जैसे निर्दोष को आतंकवादी बनाकर पेश किया जा सकता है, अगर झूठे सबूतों और बनाई गई कहानी के सहारे किसी की जिंदगी बर्बाद की जा सकती है, तो यह पूछना बिल्कुल जायज है कि ऐसे सिस्टम में शक्तिशाली पुलिस अधिकारी अपने प्रभाव, संपर्क और वर्दी की ताकत से क्या-क्या नहीं कर सकते?
मेरे पास इंतज़ार अली के पूरे इंटेरोगेशन का वीडियो आज भी उपलब्ध है। वह वीडियो पुलिस की काली और नापाक करतूतों का एक ज्वलंत उदाहरण है।
बाद में कई पुलिसकर्मी निलंबित हुए। लेकिन बड़ा सवाल आज भी वहीं है:
इतना बड़ा पाप करने वालों को क्या वास्तविक सजा मिली?
क्या किसी की नौकरी गई?
क्या कोई जेल गया?
क्या व्यवस्था ने भविष्य के लिए कोई सबक लिया?
अगर उस समय दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होती, तो शायद आने वाली पीढ़ी के पुलिस अधिकारियों के लिए यह चेतावनी बनती। लेकिन यहाँ तो हालत वही है:
हर शाख पर उल्लू बैठा है, अंजाम-ए-गुलिस्ताँ क्या होगा?
पुलिस और अपराधी में फर्क सिर्फ इतना नहीं होना चाहिए कि एक लाइसेंसी AK-47 लेकर चलता है और दूसरा बिना लाइसेंस के। फर्क चरित्र, जवाबदेही और कानून के प्रति निष्ठा का होना चाहिए।
वर्दी अगर कानून की रक्षा के लिए है, तो वह सम्मान की पात्र है।
लेकिन वही वर्दी अगर झूठे केस गढ़ने, निर्दोष को फँसाने, पत्रकार को डराने, जनता को धमकाने और अपने पद का दुरुपयोग करने लगे, तो वह वर्दी नहीं, सत्ता-प्रायोजित भय का प्रतीक बन जाती है।
आज भी जब कुछ अधिकारी अपनी करतूतों पर सवाल उठते ही जाति, धर्म, ईमानदारी और त्याग की दुहाई देने लगते हैं, तो इंतज़ार अली जैसे मामलों को याद करना जरूरी हो जाता है।
क्योंकि इतिहास बताता है:
झूठे केस बनाना आसान है,
लेकिन किसी निर्दोष की उजड़ी जिंदगी वापस करना नामुमकिन है।
आज के लिए इतना ही।
आगे फिर कभी।
#JharkhandPolice #IntazarAli #AnuragGupta #BabulalMarandi #Ranchi #Jharkhand #PoliceReform #RuleOfLaw #Accountability #FalseCase #Justice #PowerMisuse
हम भी तो झारखंड के खतियानी हैं,लेकिन हमें तो ऐसा नहीं लगता कि SIR में वोटर कार्ड से नाम हटाया जा रहा है।
मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक सामान्य और संवैधानिक प्रक्रिया है,जो फर्जी या दोहरी प्रविष्टियों को हटाने के लिए समय-समय पर की जाती है। @yourBabulal @MrityunjayS7 @narendramodi
“हमलोग खतियानी हैं, ज्ञानेश कुमार हमारा नाम वोटर लिस्ट से हटाना चाहते हैं”: JMM कार्यकर्ता का आरोप @JmmJharkhand
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मरकच्चो प्रखंड स्थित उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय, हरिजन टोला (जामू) में मध्याह्न भोजन खाने के बाद लगभग 60 बच्चों के बीमार होने की घटना अत्यंत दुखद एवं चिंताजनक है। नौनिहालों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। @HemantSorenJMM @yourBabulal