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गांव की प्रधानी का मॉडल होता है,
चुनाव जीतो, 6 महीने बाद स्कॉर्पियो या फॉर्च्यूनर निकालो, नाली-खड़ंजे का फर्जी बिल पास करवाओ, और अगर किसी गरीब का 12 हजार वाला शौचालय आया तो उसमें भी कट काटकर आधा सीमेंट-आधा बालू का ऐसा ढांचा खड़ा कर दो जो पहली बरसात में खुद शौच के लायक न बचे!
कुछ माननीय प्रधान जी लोग गरीबों का शौचालय और खड़ंजा डकार के अपच की दवा ढूंढ रहे हैं, उधर एक महिला ने पूरे गांव की तस्वीर ही बदल डाली!
बात बिहार के मोतीपुर पंचायत की है। मुखिया हैं,प्रेमा देवी। लेकिन प्रेमा देवी ने प्रधानी को ठेकेदारी नहीं, जिम्मेदारी समझा। जमीन पर जो काम हुआ, उसकी बानगी देखिए
गांव में बायोगैस प्लांट लगवाया और पाइपलाइन के जरिए 132 परिवारों के चूल्हे तक गैस पहुंचा दी। जो महिलाएं धुएं में आंखें फोड़ती थीं, वो अब बिना सिलेंडर की लाइन में लगे खाना बना रही हैं।........1/2
7 साल का इंतज़ार… और मोहब्बत की ऐसी मिसाल कि हर कोई सोचने पर मजबूर हो जाए!
कहानी के मुताबिक, लड़की 7 साल तक कोमा में ज़िंदगी और मौत के बीच जूझती रही, लेकिन उसके प्रेमी ने उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा। वह उसके होश में आने की दुआ करता रहा और आखिरकार उसके जागने की खबर ने इस प्रेम कहानी को चर्चा में ला दिया।
लेकिन सवाल सिर्फ़ वफ़ा का नहीं, आज के रिश्तों का भी है…
क्या सच्चा प्यार वही है, जो मुश्किल वक्त में भी साथ निभाए? क्या आज के दौर में कोई अपने प्यार के लिए इतना लंबा इंतज़ार कर सकता है?
रिश्ते खूबसूरत वादों से नहीं, मुश्किल वक्त में निभाए गए साथ से पहचाने जाते हैं।
आपकी नज़र में सच्चा प्यार क्या है,साथ निभाना या हालात के आगे हार मान लेना? कमेंट में अपनी राय ज़रूर बताएं।
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तालाब नहीं, गांव का पिकनिक स्पॉट एक गंदे गड्ढे को पक्के तालाब में बदला, चारों तरफ हरियाली, टहलने के लिए पाथवे और बच्चों के लिए झूले लगवा दिए। शहर वाले पार्क के लिए टिकट कटाते हैं, यहां गांव वाले शाम को हवा खाते हैं।
कॉन्फ्रेंस हॉल और डिजिटल सेंटर पंचायत भवन ऐसा बना है जैसे किसी मल्टीनेशनल कंपनी का फुली फर्निश्ड कॉन्फ्रेंस हॉल हो। साथ में डिजिटल सेवा केंद्र,ताकि आय, जाति या खतौनी के लिए ब्लॉक के चक्कर काट-काट कर चप्पलें न घिसनी पड़ें।
खेल का मैदान व भव्य एंट्री गेट युवाओं के लिए बाकायदा प्लेग्राउंड तैयार करवाया ताकि गांव का हुनर सिर्फ खेत की मेड़ तक सीमित न रहे।
काम ऐसा था कि फाइलों में दबा नहीं रहा, दिल्ली तक गूंज गया। खुद देश के प्रधानमंत्री ने बुलाकर मंच से सम्मानित किया।
फंड तो हर पंचायत में वही आता है। 15वें वित्त आयोग का पैसा हर ब्लॉक में उतरता है। फिर आपके गांव में आते-आते वो विकास केवल प्रधान जी के मकान की तीसरी मंजिल और फॉर्च्यूनर के टायर में क्यों तब्दील हो जाता है?
फर्क बजट का नहीं, नीयत का है। जब प्रधान का सपना कमीशन खाना नहीं, इतिहास बनाना होता है,तो गांव मोतीपुर बन जाता है।
अगर महिला सशक्तिकरण का असली मतलब देखना है, तो कागजी नारों से बाहर निकलिए और प्रेमा देवी के इस गांव का चक्कर लगाइए।
बाकी अपने गांव वाले प्रधान जी को यह पोस्ट जरूर टैग करिए... शायद थोड़ा जमीर जाग जाए!
आपकी पंचायत में पिछले 5 साल में कोई ऐसा काम हुआ जिसे देखकर सीना चौड़ा हो, या सिर्फ कागजों पर ही सड़कें बनीं और बह गईं? कमेंट में अपनी राय जरूर बताइए।
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शिखर पहाड़िया और जाह्न्वी कपूर की लव स्टोरी बहुत चर्चा में रही लेकिन जाह्नवी कपूर के एक बयान ने शिखर पहाड़िया को सदमे में ला दिया।
शिखर पहाड़िया अपनी पढ़ाई बीच में छोड़कर उस वक्त जाह्नवी कपूर का सहारा बने थे जिस वक्त उन्हें संभालने वाला कोई नहीं था।
जाह्नवी कपूर ने कहा "मै नहीं चाहती कि मेरे रिश्ते को किसी की नजर लगे और ना ही मैं खुलकर बोलना चाहती हूं,मुझे लगता है कि हर समय यह कहना किसी को कुछ पता नहीं चलना चाहिए थोड़ी ज्यादा..1/2
Baijnath Sen retweeted
सवाना के जंगलों में शेरनियों का शिकार.....शेरनियों के जाल में फंसा लकड़बग्घा...!!😱
Baijnath Sen retweeted
सस्ती बाइक खरीदने गया था, शोरूम ने टॉप मॉडल का बिल थमा दिया.
एक व्यक्ति कम बजट में बाइक खरीदने के लिए हीरो के शोरूम पहुंचा
उसने साफ कहा कि उसे हीरो स्प्लेंडर का बेस मॉडल चाहिए, क्योंकि वह ज्यादा पैसे खर्च नहीं करना चाहता
शोरूम वालों ने उसकी बुकिंग की और रजिस्ट्रेशन समेत सभी कागजी कार्रवाई पूरी कर दी
व्यक्ति खुश था कि उसकी जरूरत के हिसाब से बाइक मिल गई।
लेकिन असली कहानी तब शुरू हुई, जब वह बाइक घर लेकर पहुंचा और अपने डॉक्यूमेंट्स चेक करने लगा
कागज देखते ही उसके होश उड़ गए..बाइक तो उसे स्प्लेंडर बेस मॉडल दी गई थी, लेकिन..1/2 👇
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M. Tech की डिग्री हासिल की, BARC जैसी प्रतिष्ठित संस्था में नौकरी की फिर सब कुछ छोड़कर संन्यासी बन गए।
जिस उम्र में लोग करियर और दौलत के पीछे भागते हैं, उस उम्र में इन्होंने जिंदगी का रास्ता ही बदल दिया।
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A daughter's happiness matters more than society's show-off. Respect her choices too. ❤️
💔 लोग अपने अहंकार की संतुष्टि के लिए अपनी पसंद और समाज में बेटी की शादी पर करोड़ों रुपये खर्च कर देते हैं, ताकि वह रोज घुट-घुटकर जीने को मजबूर रहे।
😔 लेकिन बेटी ने किसी से प्रेम कर लिया अपनी पसंद बता दी तो अहंकार को इतनी चोट पहुँचती है कि उससे रिश्ता तोड़ने और घर से निकालने तक को तैयार हो जाते हैं।
🙏 अरे, गुलामी की मानसिकता वालों! अगर बच्चे लायक हैं, तो शादी में दिखावे पर करोड़ों खर्च करने के बजाय उतने पैसों से दोनों बच्चों का जीवन सेट हो जाएगा।लड़का पढ़ा-लिखा और थोड़ा संस्कारी होना चाहिए, बाकी तो अपना-अपना भाग्य है।
❤️ महत्वपूर्ण बात यह है कि लड़का आपकी बेटी से प्रेम करता है, उसका ख्याल रखता है और उसे सम्मान देता है या नहीं। इससे अच्छी बात आपके लिए दुनिया में कुछ नहीं है।
🙏 समझ गए ना? एक बार सोचिएगा जरूर।
Annu yadav,
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ट्रेन में एक पिता अपनी छोटी सी बच्ची के साथ नमक और रोटी खाने को मजबूर हैं...😳
आज के समय में भी ऐसे लोग हैं, जिन्हें दो वक्त की रोटी के साथ सब्जी तक नसीब नहीं होती। गरीबी की इससे बड़ी तस्वीर और क्या होगी...?
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वाराणसी में जब भाजपा MLC चुनाव हारी तो ओ.पी. राजभर ने कहा, ये पढ़े लिखे लोगों का वोट है। आम जनता का जनादेश नहीं है, मंत्री जी का मतलब साफ हैं आम जनता पढ़ी लिखी नहीं है।
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पति एक साल से लापता, ससुराल में रहने की जगह नहीं आखिर कब मिलेगा इस महिला को इंसाफ?
उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में एक महिला अपने हक और न्याय की गुहार लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंची। महिला जमीन पर दंडवत करते हुए अपनी फरियाद लेकर पहुंची, जिसे देखकर हर किसी का ध्यान उसकी ओर गया।
महिला का आरोप है कि उसका पति पिछले एक साल से लापता है। ससुराल वाले न तो उसे पति की जमीन में हिस्सा दे रहे हैं और न ही घर में रहने की जगह।
महिला का कहना है कि पुलिस से शिकायत करने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आखिरकार उसे अपनी पीड़ा बताने के लिए इस तरह जिलाधिकारी के सामने गुहार लगानी पड़ी।
कैसे हुआ 4 से 5 असंभव...😳
@grok क्या यह संभव है...?
ट्रेन में एक पिता अपनी छोटी सी बच्ची के साथ नमक और रोटी खाने को मजबूर हैं...😳
आज के समय में भी ऐसे लोग हैं, जिन्हें दो वक्त की रोटी के साथ सब्जी तक नसीब नहीं होती। गरीबी की इससे बड़ी तस्वीर और क्या होगी...?
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UP के कुशीनगर में एकतरफा प्यार का खौफनाक अंत.....
कुशीनगर में एक सिरफिरे आशिक ने एकतरफा प्यार में लड़की के घर में घुसकर उसकी हत्या कर दी।
बताया जा रहा है कि युवक ने घर में घुसकर लड़की को दबोच लिया और उसे एक कमरे में बंद कर दिया। इसके बाद उसकी पिटाई की और फिर गला रेतकर उसकी जान ले ली।
लड़की की चीख सुनकर घरवाले मौके पर पहुंचे और दरवाजा तोड़ा, लेकिन तब तक लड़की की सांसें थम चुकी थीं।.........1/2
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धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी आपको अपनी भाषा और शब्दों के चयन में संयम रखना चाहिए था। लाखों लोग आपको सुनते हैं, इसलिए आपके शब्दों का असर भी व्यापक होता है।
जिस महिला से उम्मीद की जाती है कि वह पति की लंबी उम्र के लिए भूखी-प्यासी रहे, उसी महिला की शिकायतों को मजाक बनाकर उड़ा दिया जाता है।
महिलाएं सिर्फ एक दिन सम्मान की हकदार नहीं हैं, उन्हें साल के पूरे 365 दिन सम्मान मिलना चाहिए।
UP के कुशीनगर में एकतरफा प्यार का खौफनाक अंत.....
कुशीनगर में एक सिरफिरे आशिक ने एकतरफा प्यार में लड़की के घर में घुसकर उसकी हत्या कर दी।
बताया जा रहा है कि युवक ने घर में घुसकर लड़की को दबोच लिया और उसे एक कमरे में बंद कर दिया। इसके बाद उसकी पिटाई की और फिर गला रेतकर उसकी जान ले ली।
लड़की की चीख सुनकर घरवाले मौके पर पहुंचे और दरवाजा तोड़ा, लेकिन तब तक लड़की की सांसें थम चुकी थीं।.........1/2
















