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CCTV footage showed that Sahil was cheating .
His parents made a whole circus to get compensation.
Prof. Doolla caught Sahil cheating Red-handed that can be seen clearly in CCTV footage .
Prof. Doolla got relieved from his duty because Sahil belonged to SHOSHIT VANCHIT PEEDIT group .
Now Social Justice minister is saying Sahil will get justice ... What about justice for Prof. Doolla and his reputation ..
Sahil Parents should be punished for poor parenting and creating this horrendous situation after his suicide and making a joke of their only son.
दिवंगत साहिल वाकोडे यांच्या आई-वडिलांची भेट घेऊन त्यांचे दुःख जाणून घेतले. साहिल यांना न्याय मिळावा आणि आरोपींवर ॲट्रॉसिटी कायद्यानुसार कठोर कारवाई व्हावी, अशी मागणी त्यांच्या पालकांनी केली. या प्रकरणात योग्य ती कायदेशीर कारवाई करण्यासाठी पाठपुरावा करण्याचे आश्वासन दिले. पीडित कुटुंबाला न्याय मिळवून देण्यासाठी मी कटिबद्ध आहे!
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सम्राट ब्रो जब खुरपेंच पर FIR से फुर्सत मिल जाए तो थोड़ी तिरछी नज़र इन मामलों पर भी मार देना।
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Someone seems to have woken up @YouTubeIndia and started to suspend earnings on multiple videos in a single day. They have done it earlier as well when they sent 'no ad earnings' on as many as 68 videos in one go. That was a few months earlier.
Seems, they don't like me criticising CJP, RaGa, Sharjeel, Ravan or Congress... Fair enough. I get that. I will mock these people and ideologies even more. I am Soros agent, well funded 😂
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रातो रात सरकारी ज़मीन पर खड़ी होती
अवैध मस्जिद मेट्रो विहार - विभाग सोया है ? हम नहीं
Rt | If u support
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ज्वैल ऑफ इंडिया प्रोजेक्ट: 25 IAS/IPS को फ्लैट, मूल फाइल गायब—-
शांति धारीवाल ने 2001 में ज्वैल ऑफ इंडिया प्रोजेक्ट मूल फाइल क्यों गायब करवाई? आखिर इस फाइल में कौन-से राज़ छिपे थे?
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और फिर आपकी पार्टी ने उन्हें सप्रेम पद्म विभूषण दे दिया।
आज 30 अक्टूबर है। आज ही के दिन सपा के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह जी ने 1990 में रामभक्तों पर अंधाधुंध गोलियां चलाकर नरसंहार करने का काम किया।
अखिलेश यादव एंड कंपनी ये मानती है कि यूपी की जनता ये भूल गई।
अखिलेश बाबू, आप तो क्या, आपकी तीसरी पीढ़ी तक यूपी की जनता आपको माफ नहीं करेगी: माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री @AmitShah जी
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कुर्सी सरकारी, ठाठ महाराजाओं वाले—-
50 हज़ार करोड़ की संपत्ति वाले IAS/IPS अपनी संपत्ति शून्य दिखाते हैं—
मेरे नाम तेरे राज्य में,
तेरे नाम मेरे राज्य में…
तू मेरी संपत्ति सँभाल ले,
मैं तेरी दौलत का रखवाला बन जाऊँ!
बैचमेट का रिश्ता या संपत्तियों की सुरक्षा
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बड़ी ख़बर-
योगी आदित्यनाथ की सरकार में इतना बड़ा खेल!
212 अरब की ज़मीन का सिर्फ 5 अरब में निपटारा!
वो भी नोएडा जैसी प्राइम लैंड पर।
दैनिक जागरण की इस Exclusive ख़बर को पढ़िए।
नोएडा में बिल्डरों को 15 साल पुरानी दर पर 85 एकड़ जमीन देने की तैयारी। किसान परिवारों में नाराजगी।
खबर के मुताबिक जमीन का जो रेट अब 5 लाख रुपए प्रति वर्गमीटर है, उसे 15 साल पुरानी मात्र 12050 रुपए की दर पर आवंटित करने की तैयारी है।
ख़बर बताती है कि इस कदम से प्राधिकरण को सिर्फ 5 अरब, 12 करोड़ रुपए के करीब हासिल होंगे,
पर यदि यही ज़मीन बाजार दर पर बिल्डरों को दी जाती तो करीब 212 अरब 50 करोड़ का राजस्व मिलता।
क्या ये सच है कि योगी आदित्यनाथ के दौर की असली स्टोरी करप्शन है?
हिंदू-मुसलमान केवल डाइवर्जन है!!
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नाम ही शिखर है, जैसा नाम वैसा ही काम उनका हुआ है। शिखर की तरह ही उन्होंने काम किया है। एक साथ 40 विला लेने की खबर अपने आप में चौंकाने वाली है। इसके लिए मुख्यमंत्री जी को खुद को जिम्मेदारी लेनी चाहिए। उनके कार्यकाल को 3 साल होने आए हैं, इन 3 सालों में सबसे बड़ा घोटाला कोई सामने आया है तो यही आया है। मुख्यमंत्री जी की अध्यक्षता में मीटिंग करके छूट दी गई थी। जो आरोप लगे हैं जिसे झूठ साबित नहीं किया जा सकता। जिन पर आरोप लगे हैं वो भी इन्हें झुठला नहीं सकते हैं। कलेक्टर के तौर पर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन के रूप में तथा मुख्यमंत्री कार्यालय के एसीएस के तौर पर जो फैसले हुए हैं वो अपने आप में स्पष्ट करते हैं कि जानबूझकर के भ्रष्टाचार की हदें पार करते हुए दिलेरी और साहस के साथ फैसले किए हैं। सोच सकते हैं कि मुख्यमंत्री कार्यालय में और क्या - क्या घोटाले हो रहे होंगे।
मुख्यमंत्री को खुद को आगे आना चाहिए। एसीबी को जांच देने से काम नहीं चलेगा, खाली एपीओ करने से काम नहीं चलेगा, सीबीआई या ईडी के सामने केस जाए। दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा।
अधिकारी दम्पति विदेश बैठे हुए हैं,उन्हें तत्काल वापस आना चाहिए था। अगर उनका कोई दोष नहीं है, मीडिया में कन्फ्यूजन पैदा हो गया है, उनको चाहिए तुरंत वापस आएं और अपनी स्थिति अविलंब स्पष्ट करें।
एक बार खबर आई थी कि ये अधिकारी, आईजी सीएमओ, मुख्यमंत्री जी और उनके परिवार के लोग थे या कौन थे, आपस में छीनाझपटी भी हो गई थी, मुख्यमंत्री के सामने, कोई कहते हैं कि थप्पड़ लगा दिए। पर बहुत बड़ा कांड हुआ था। उसके बाद में आईजी को उदयपुर शिफ्ट किया गया मतलब उनको प्राइज़ पोस्टिंग दी गई कि अपना मुँह बंद रखो। जो काम हमने यहां करवाया आपसे, आपके थ्रू,और ये घटना हुई है मुख्यमंत्री के सामने, उस पर आप अपना मुँह बंद रखोगे इस शर्त के साथ में उनको उदयपुर का आईजी बनाया गया है।
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एक बात अच्छी तरह समझ लीजिए,
डेमोग्राफी बहुत तेजी से बदल रही है।
आज के वोटजीवी, नोटजीवी, सत्ताजीवी नेता 25 वर्ष बाद आपका घर-परिवार, मकान-दुकान, खेत-खलिहान, उद्योग-व्यापार और मठ-मंदिर बचाने नहीं आएंगे
लेकिन लव जिहाद, लैंड जिहाद, ड्रग जिहाद, घुसपैठ जिहाद, धर्मांतरण जिहाद, जनसंख्या जिहाद और कालाधन, हवाला, भ्रष्टाचार के खिलाफ बना कठोर कानून आपकी 25 पीढ़ियों को बचाएगा,
इसलिए दल गुलामी छोड़िये और सांसद से मिलकर कठोर कानून की मांग करिए।
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आज मैंने राजस्थान सरकार के मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp के ACS रह चुके वरिष्ठ IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल,उनकी IPS पत्नी प्रशाखा व परिजनों द्वारा रिश्तेदारों द्वारा विला तथा कॉटेज खरीदने से जुड़े पूरे मामले को लेकर प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी व केंद्रीय गृह मंत्री श्री @AmitShah DOPT मंत्री डॉक्टर जितेंद्र सिंह जी को पत्र भेजकर पूरे मामले की CBI व ED से जांच करवाने की मांग की साथ ही भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष का भी विला तथा कॉटेज खरीद से जुड़े मामले में सामने आए नाम का जिक्र करते हुए राजस्थान में सत्ता के दुरुपयोग से व्याप्त भ्रष्टाचार का जिक्र किया साथ ही यह भी अवगत करवाया कि किस तरह भजनलाल जी की सरकार ने विधायक कोष जारी करने के एवज में विधायकों द्वारा कमीशन लेने से जुड़े मामले में भ्रष्ट विधायकों को बचाया गया |
मैंने प्रधानमंत्री जी को लिखे पत्र में कहा है कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इस प्रकरण में किसी भी व्यक्ति को उसके पद, प्रभाव अथवा राजनीतिक और प्रशासनिक संपर्कों के आधार पर जांच से छूट नहीं मिलनी चाहिए।
@PMOIndia @DoPTGoI
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कुछ देर में सुनवाई शुरू होने वाली है
Dda ने घुटने टेक दिए रिप्लाई में लिख दिया अतिक्रमण है
विधायक तेरे साथ है मुल्ला और प्रीत सिरोही अकेला
लेकिन फिर भी लड़ूँगा मैं और देख एक एक ईट गिरेगी
भारत माता की जय
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दो तथ्य हैं...
■ भारत में अतिरिक्त जिला जज की पगार अधिकतम सवा दो लाख ₹ महीना है।
■ और भारत में मर्सडीज बेंज कार की कीमत 50 लाख से 4.5 करोड़ तक हो सकती है।
केरल में कोच्चि के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज रीनो फ्रांसिस जेवियर के 17 साल के नाबालिग बेटे को तेज रफ्तार मर्सडीज चलाते हुए #रील्स बनाने का बहुत उम्दा शौक है। बड़े बाप की औलाद है, ऐसे शौक होने भी चाहिए। हमारी औलाद भी तो लाख-दो लाख की बाइक पर रील्स बनाती है।
वाकया यदि 25 अक्टूबर की देर रात करीब ढाई बजे का है। जज साहब के योग्य बेटे ने कोच्चि में तेज रफ्तार मर्सिडीज-बेंज कार से एक स्कूटर को पीछे से टक्कर मार दी। स्कूटर सवार जय बालकृष्णन की मौके पर ही मौत हो गई। जय भाई सब्जी की दुकान लगाते थे। उम्र 55 साल थी।
मर्सडीज जज साहब के नाम रजिस्टर्ड है, और कार की चाभी नाबालिग बेटे के कब्जे में रहती होगी। बिना चाभी के कार तो रेंगेगी नहीं!
खैर हम मामूली लोग, मामूली आदमी की मौत पर बात नहीं करेंगे। क्योंकि हादसे के बाद #विशेषाधिकार_समाज को बचाने में #व्यवस्था सक्रिय हो गई। हम-आप जैसे मामूली लोगों का इल्जाम है...
■ जज के बेटा को बचाने के लिए कार पर लगा #जज_साहब वाला स्टिकर हटा दिया। धाराएं बेहद हल्की-फुल्की लगाईं।
■ फिर बिना देर किए इंस्टाग्राम से तेज रफ्तार गाड़ी चलाने वाले रील्स/वीडियो डिलीट कर दिए गए।
फिलहाल केरल के मामूली लोगों के हो-हल्ले के बाद जज साहब पर भी मुकदमा दर्ज हुआ हालांकि जज साहब को तत्काल अंतरिम जमानत भी मिल गई। नाबालिग बेटे को दुबारा हिरासत में लिया गया है।
लेकिन बुनियादी सवाल वहीं खड़े हैं..
■ जज साहब की पगार से इतनी महंगी कार संभव है?
■ सरकार यदि ऐसे मामलों में #माता_पिता को जिम्मेदार ठहराने के कानून लाए तो हम-आप जैसे मामूली नागरिकों का क्या स्टैंड होगा? या होना चाहिए?
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हम धीरे धीरे 100% आरक्षण की तरफ बढ़ रहे हैं
62 सीटों में से 60 सीटें आरक्षित कर दी गई है यानि कि लगभग 97% आरक्षण कर दिया गया है
आरक्षण की गंदगी चारों तरफ इस तरह से फैला दी गई है,जिसे समेटना या साफ करना अब किसी के लिए संभव नहीं है
आरक्षण को पूरी तरह खत्म करना ही एकमात्र हल नज़र आ रहा है
मोदी ने आरक्षण खत्म नहीं किया तो BJP को दुबारा से 2 सीटों पर वापस पहुंचने में देर नहीं लगेगी
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मधुबनी के ट्रैफ़िक DSP सुजीत कुमार को जैसे ही 30000 घूस लेते रंगे हाथ पकड़ा गया वैसे ही उनकी तबीयत बिगड़ गई,
एक डीएसपी को इस तरह इतनी छोटी रकम के लिए पकड़ लेना कहाँ का न्याय है???
मैं क्षुब्ध हूँ!!!
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पत्रकार: क्या तुमने हाल ही में सामने आए एपस्टीन फाइल के दस्तावेज़ देखे हैं?
मुस्लिम युवती: हाँ, मैंने देखे हैं.
पत्रकार : क्या आपको पता है कि ट्रंप ने नौ साल की बच्ची के साथ संबंध बनाए थे?
युवती: हाँ, पता है
पत्रकार: बहुत घिनौना है, है ना?
मुस्लिम युवती: हाँ, बिल्कुल.
पत्रकार: क्या आपने सहीह अल-बुखारी 5134 पढ़ी है।
मुस्लिम महिला - नहीं , उसमें क्या है ?
पत्रकार - उसमें आयशा से 6 साल की उम्र में शादी और और नौ वर्ष की आयु में......
मुस्लिम महिला - 😵💫😵💫😵💫
सवाल किसी धर्म का अपमान करना नहीं, बल्कि एक ही नैतिक कसौटी को सब पर समान रूप से लागू करना है।
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जब तक 100₹ से बड़ा नोट और 1,000 से ऊपर कैश लेनदेन बंद नहीं होगा
तब तक कालाधन हवाला भ्रष्टाचार खत्म नहीं होगा
जब तक कालाधन हवाला भ्रष्टाचार खत्म नहीं होगा
तब तक अलगाववाद जिहाद घुसपैठ धर्मांतरण और ड्रग कारोबार खत्म नहीं होगा
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First in my bloodline to witness a Chief Minister file an FIR over factually correct criticism and then lead a march to “save democracy.” 🤡
#WATCH | Patna, Bihar: Chief Minister Samrat Choudhary leads the 'Loktantra Bachao, Arajakata Hatao' foot march. He will also address a gathering at Kargil Chowk.
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JUSTICE SK KAIL IS A PERFECT EXAMPLE OF THE JUDICIAL TURPITUDE LACED WITH THE SELF ENTITLEMENT
Just listen to him and you will feel like going to the nearby park shout expletives at the highest decibels.
This is why we need immediate implementation of the NJC judicial reforms recommendations asap.
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Around 20 October 2025, Saurav Das organised a Diwali party which was also attended by retired Supreme Court judge S.K. Kaul.
On 1 November 2025, a hit-job article on Justice D.Y. Chandrachud, written by Saurav Das, was published in The Caravan magazine.
At that time, Saurav Das was just a 25-year-old novice who knew nothing about journalism or law.
How many times does a retired Supreme Court judge attend such parties organised by such novice?
Isn’t it unusual?
What is the possibility that the article was actually written by Justice S.K. Kaul or one of his subordinates, and Saurav Das’s name was merely used for it?
































