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मेरे लिए तुलसी कृत श्रीरामचरितमानस ही रामायण है जिसे मैं 10 की उम्र से पढ़ता आ रहा हूं। इसमें राम सहज, सरल, करुणामयी आडंबर रहित मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। भाषा भी जन जन को समझ में आने वाली है इसीलिए यह वाल्मीकि रामायण से ज्यादा पढ़ी जाती है। रामानंद सागर जी ने अपनी रामायण को इसी को+
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आपको और आपके पूरे परिवार को दीपावली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।
माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश जी की कृपा सदैव बनी रहे आपका जीवन सुख, समृद्धि, सफलता और खुशियों से जगमगाता रहे।
जय मॉं लक्ष्मी 🙏🚩
शुभ_दीपावली
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कुछ तो बेहद खास रिश्ता है श्रीराम और हम हिंदुओं के बीच... सदियों से उनकी कथा सुनते आ रहे हैं सैकड़ों बार सुनने के बावजूद हर बार वही कहानी हमें हिम्मत और धैर्य देती है।
भगवान के अनेक रूप हैं लेकिन श्रीराम सिर्फ आराध्य नहीं, हमारे अपने हैं… हमारे राजा, हमारे अभिभावक।
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धनतेरस से लेकर दिवाली की रात तक बाजार से अपना जितना धन बचा पाए समझो आप पर उतनी ही लक्ष्मी माता की कृपा हुई है बाकी धनिया और झाड़ू खरीदने जैसे बहुत से टोटके ज्यादा भरोसेमंद नहीं है ।
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यदि आपको प्राचीन भारत के उत्कर्ष स्वरूप में राजनीति , प्रेम ,मित्रता, युद्ध एवं नगरीय जीवन की विलासिता आदि का ठीक ठीक प्रदर्शन एवं उत्तम कथ्य एवं साथ में ही साहित्य के विविध अलंकारों एवं वाक्य विन्यास की जटिलता से झंकृत होना चाहते हैं तो डण्डिन कृत दशकुमारचरितम पढ़े।
😊😊🙏
पिछले चार दिनों के अथक मेहनत करने के उपरांत इस वर्ष दीपावली की साफ़ सफाई का कार्य आज स्नानागार और गुसलखाना साफ करने के बाद समाप्त हुआ। अब अगले वर्ष में फिर यही कार्य दोहराना पड़ेगा। अपनी पत्नी को प्यार करने वाला पति इस चक्र से बाहर नहीं निकल सकता है। यह सब अविवाहित नहीं समझ सकते।
भारत में कुछ मुख्य रामायण हैं - वाल्मीक रामायण, श्रीरामचरितमानस, अध्यात्म रामायण, आनंद रामायण, कम्बन रामावतारम, श्रीरंगनाथ रामायण, कृत्तिवासी रामायण, सप्तकांड रामायण आदि। जब इतनी रामायण हैं और सबमे अपने अपने हिसाब से चित्रण किया है। प्रसंग भी सब अलग अलग हिसाब से लिखे गए हैं।
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जो रामायण फ़िल्म पर FIR करने की बातें कर रहे, निपट मूर्ख प्रजाति है।
नाट्य साहित्य का अंग है। साहित्य की आलोचना हो सकती है, उसपर अपने मत थोपना अथवा उसको ध्वस्त करने का अहम् बताना, एकाधिकार को जन्म देने की प्रवृति है।
यह क्या बवाल बना दिया है। परशुराम संवाद तो जनक जी के राजदरबार में हुआ था। इतनी भव्यता दे दिया कि बेसिक बात ही का ध्यान नहीं रहा।
















