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नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे🚩 #𝗗𝗶𝗴𝗶𝘁𝗮𝗹_𝗠𝗮𝗿𝗸𝗲𝘁𝗶𝗻𝗴_𝗸𝗲_𝗙𝘂𝗻𝗗𝗮𝘆 #𝗧𝗮𝗹𝗸𝗶𝗻𝗴2𝗔𝗜 https://nitter.cf/t.co/Tl4QZJPiHZ

Joined April 2025
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नौटंकीबाज😂😂😂😂
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माननीय मुख्यमंत्री आदरणीय रेखा गुप्ता जी की कर्मठ और जुझारू भाजपा सरकार ने वह कर दिखाया जो उस निकम्मे निठल्ले के समय में असंभव दिखता था, सिर्फ डेढ़ वर्ष में वायु गुणवत्ता यूरोप अमेरिका से अच्छी हो गई। हवा साँस लेने लायक हो गई, यह है आपके एक वोट का कमाल, दिल्ली दिल वालों की🙄😐😑
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।। ॐ शांति शांति शांति 🙏🏻।।
आज हमारे पूरे परिवार के लिए अत्यंत दुःख और पीड़ा का दिन है। हमारी पूज्य माताजी श्रीमती काशी बाई जी हमें छोड़कर अनंत की यात्रा पर प्रस्थान कर गई हैं। माँ का जाना जीवन में एक ऐसी रिक्तता छोड़ जाता है, जिसे कोई भर नहीं सकता। आज उनकी स्मृतियाँ मन को भावुक कर रही हैं। परमपिता परमेश्वर के श्रीचरणों में प्रार्थना है कि माताजी को अपने दिव्य धाम में स्थान प्रदान करें। पूज्य माताजी का अंतिम संस्कार दोहपर 03 बजे गृह ग्राम जैत, जिला सीहोर में होगा। ॐ शांति! शोकाकुल परिवार शिवराज सिंह चौहान नरेंद्र सिंह चौहान शशि सिंह चौहान रोहित सिंह चौहान वरुण सिंह चौहान
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🤣🤣
EVM के बाद बैलेट पेपर से भी धोखा खाने के बाद, अब पप्पू और उसके चमचे टॉयलेट पेपर से चुनाव करवाने की माँग कर सकते हैं।
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भूटान में शिंटाफू झील में ग्लेशियल लेक फट गई है, नॉर्थ बंगाल (अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी, कूच बिहार) और असम (कोकराझार, धुबरी) में संकोश नदी के किनारे रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है। भूटान में हाईवे रूट और लोकल इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा, किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। NDRF और SDRF की टीमें तैनात हैं और 10,000 से ज़्यादा लोगों को अलीपुरद्वार के राहत सेंटर में पहुंचाया गया है।
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मद्रास हाई कोर्ट ने पत्रकार सौरव दास की पहचान और बैकग्राउंड की जांच करने और उनके माता-पिता की जांच करने और आरोप सही पाए जाने पर उनका पासपोर्ट और आधार कार्ड कैंसल करने की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया है।
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बहुत सही जवाब दिया आपने। ये उसी दिमागी नक्सल की घरवाली तो नहीं? जो आजकल बौराया हुआ है?
हमें भी बड़ी हैरानी होती है कि 21वीं सदी में भी "तुम्हारी" पढ़ी लिखी औरतें हलाला करवा रही हैं ताकि वो पवित्र हो सकें।
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*लोग चाहते हैं-पंजाब में 92 MLA को टिकट न मिले:* AAP के 95%, कांग्रेस के आधे, BJP के सभी विधायक नापसंद; भास्कर का सर्वे dainik.bhaskar.com/TIpaljGbE…
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धन की तीन गतियाँ हैं, उत्तमगति अपने ही हाथों उसे सत्कार्य के द्वारा भगवान की सेवा में लगा दिया जाए, मध्यमगति उसे अपने तथा अपनी संतान के शास्त्रविहित सुख-भोगार्थ ख़र्च कर दिया जाए, तीसरी अधमगति उस धन की होती है, जो न तो भगवान की सेवा में लगता है और न सुखोपभोग में ही लगता है🙄😐😑
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#अर्नब नाम ही काफी है। @Asksindia_
अर्नब का असर है साहब… अब ये Cyclone वाला हो या TV वाला, जहाँ पहुँचता है, वहाँ हंगामा मच ही जाता है! 🌪️😂 #मेरी_दृष्टिसे_भारत
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जीवन में कुछ प्रश्न अनुत्तरित रह जाते हैं। कभी उत्तर पाने का मार्ग अवरुद्ध होता है तो कभी उत्तर का भय मनुष्य को उस उत्तर से बचने को बाध्य करता है।
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भारत के एक प्रमुख वैज्ञानिक और स्वप्नदृष्टा, देश के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में अहम् भूमिका निभाने वाले डॉ. होमी जहांगीर भाभा जी की जयंती पर सादर नमन🙏
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दोस्तों आज बड़े दुख के साथ कह रही हूँ कि मैं अब एक्टिव नहीं रहूंगी क्योंकि मेरी ID पर रिच गायब हो गई है, एक बार सस्पेंड हुई थी उसके बाद से ही रिच पता नहीं कहां चली गई, इसके पहले मेरी पोस्ट मिलियन में जाती थी मैं यहां बहुत मेहनत करती हूं डेली कम से कम 500+ लोगों को रिप्लाई करती हूं पर सारी मेहनत बेकार जा रही है Home टाइमलाइन इंप्रेशन अच्छे नहीं जुड़ रहे हैं, अगर आप लोगों के पास कोई सुझाव है तो बताइए अन्यथा यहां से टाटा बाय बाय करनी पड़ेगी आपकी पीहू 🙏
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भारत ने 12 वर्षों में 49. 6 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है। अक्टूबर 2026 के विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, भारत में गरीबी दर (प्रति दिन 4.20 डॉलर) 2011 में 57.7 प्रतिशत से घटकर 2023 में 16.1 प्रतिशत हो गई, जिससे 49.6 करोड़ लोग गरीबी से मुक्त हुए। अत्यधिक गरीबी (प्रति दिन 3 डॉलर) 27.1 प्रतिशत से घटकर 2.6 प्रतिशत हो गई, जबकि असमानता कम होकर गिनी सूचकांक 23.0-23.5 पर आ गई, जो चीन या अमेरिका से कम है। मजबूत उपभोग, महिलाओं के रोजगार में वृद्धि और खाद्य सब्सिडी और JAM जैसे कल्याणकारी कार्यक्रमों ने इस प्रगति को गति दी, हालांकि ग्रामीण क्षेत्र शहरी क्षेत्रों से पीछे हैं और विशेषज्ञ इन उपलब्धियों को स्थायी बनाने के लिए बेहतर रोजगार की मांग कर रहे हैं।
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Jawaharlal Nehru writes in his Biography that his grandfather was last kotwal of Delhi. "My grandfather, Ganga Dhar Nehru, was Kotwal of Delhi for some time before the great Revolt of 1857. He died at the early age of 34 in 1861 [or thirty-four in 1861]. The Revolt of 1857 put an end to our family's connection with Delhi..." SORCE: (Chapter 1-Descent from Kashmir page 2&3 - Jawaharlal Nehru An autobiography). However, Documented Historical Kotwals (1850–1857) of Delhi: According to comprehensive historical accounts of the late Mughal court—such as those compiled in William Dalrymple's The Last Mughal and contemporary Urdu diaries—the individuals who actively functioned as the Kotwals of Delhi under Emperor Bahadur Shah Zafar leading up to and during the 1857 uprising were: • Kazi Faizullah: Served as the Kotwal of Delhi in the period immediately leading up to the 1857 mutiny. • Mirza Moinuddin Hasan Khan: A prominent official who was appointed to maintain order over the city and the rebel sepoys during the peak of the 1857 uprising. • Syed Mubarak Shah: A key administrative figure whose detailed diaries and records from the period serve as a primary primary source for the policing and collapse of Delhi during the mutiny. Source: THE LAST MUGHAL - WILLIAM DARLYMPLE williamdalrymple.com/books/t… From examination of the above facts, it appears a self declaration and wikipedia posting that Ganga Dhar Nehru as kotwal of Delhi are the ONLY NOTINGS. Ganga Dhar Nehru as kotwal does not find any mention in any historical records. Source: ** Kotwal's Dairy - An account of Delhi during war of independence 1857. Translated from urdu to english by R.M.Edwards. From original dastavez, NOTINGS of 1857 revolt, translations of RM ANDREWS & WILLIAM DARLYMPLE mughal records in National archives have no kotwal by name of NEHRU as claimed by Jawaharlal in his autobiography. Jawaharlal writes in his biography that gangadhar fled agra during British control of Delhi and abolition of kotwal post. Based on historical data available (not claimed) was kazi the person that fled agra / delhi? So the question is who are Nehrus? Why did they change to GANDHI? How would India be had a kazi / Ghazi / mubarak / khan was first PM of india? Was there a big coverup in Indian history? Is it the reason for the muslim appeasing policies of congi govts? In my mind, I think KAZI (may commonly referred as Ghazi) fled Delhi Agra during British repression post 1857 and re-appeared as Nehru waley nehru. JLN may have in advertently left a bread crumb in his biography.
हिंदू विरोधी कांग्रेस। ईसाइयों के त्यौहार क्रिसमस को देखते हुए राहुल गांधी ने 2023 में भारत जोड़ो यात्रा 9 दिन के लिए स्थगित कर दी थी। लेकिन हिंदुओं के त्यौहार दिवाली पर दुकानदारों के करोड़ों रुपए के होने वाले नुकसान से कोई लेना देना नहीं है।
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Congress ke time 1gb data ₹269 me milta tha
Congress ke time itne SIM cards chalte the...
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जो भी पुरुष मित्र आज अपनी बैटर हाफ के साथ करवा चौथ का व्रत कर रहे हैं क्या वो अशून्य द्वितीया व्रत के बारे में जानते हैं? करवा चौथ भी वो करे, वट सावित्री भी वो करे।
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|| ॐ नमो नारायण || अत्यंत भावपूर्ण अभिव्यक्ति 🙏 सनातन दर्शन भी यही सिखाता है कि प्रेम कभी समाप्त नहीं होता, केवल उसका स्वरूप बदल जाता है। #श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण स्वयं कहते हैं- “न जायते म्रियते वा कदाचित्” आत्मा न कभी जन्म लेती है, न कभी मरती है। शायद शिवांगी का भौतिक रूप से बिछुड़ जाना एक सत्य है, लेकिन प्रेम, स्मृतियाँ और उनसे उपजा आत्मबोध जीवन में सदैव जीवित रहते हैं। वैराग्य का अर्थ प्रेम से विमुख होना नहीं, बल्कि प्रेम को मोह की सीमाओं से मुक्त कर व्यापक चेतना में अनुभव करना है। कुछ रिश्ते अलग होकर/ बिछुड़कर, जीवन का अर्थ समझा जाते हैं। जहाँ तक कहानी की पूर्णता का प्रश्न है, शायद हर कहानी का अंत शब्दों में नहीं होता। कुछ कहानियाँ मौन में पूर्ण होती हैं और आत्मा में अनंत हो जाती हैं। ईश्वर शिवांगी की आत्मा को शांति प्रदान करें और आपने इस विरह को लोकमंगल, करुणा और आध्यात्मिक चेतना में रूपांतरित किया है वह आपके #हठयोग की शक्ति को दर्शाता है। हरि अनंत, हरि कथा अनंता। || ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः || 🙏 #पुनश्च आपके साथ तुंगनाथ मद्महेश्वर केदारनाथ जी की यात्रा करने की इच्छा है। बाकी हरि इच्छा 🙏🏻
प्रिय कृष्ण दास जी, और उन सभी मित्रों के नाम जो यह सवाल पूछ रहे हैं… सबसे पहले, इसे धृष्टता नहीं कहूँगा। यह उस प्रेम के प्रति आपकी संवेदना है, जिसे आपने मेरे शब्दों के माध्यम से महसूस किया। जब कोई कहानी हृदय तक पहुँच जाती है, तो उसके पात्र केवल पात्र नहीं रह जाते। हम उनकी पीड़ा को अपनी पीड़ा और उनकी सलामती को अपनी चिंता समझने लगते हैं। आपने पूछा-क्या शिवांगी जी इसी लोक में हैं? इस प्रश्न का उत्तर देना आज भी मेरे लिए आसान नहीं है। भौतिक रूप से कहूँ, तो नहीं। शिवांगी अब इस संसार में नहीं है। मेरी यायावरी, मेरा वैराग्य और मेरे रास्तों की धूल-इन सबकी कहानी उसके जाने के बाद ही शुरू हुई। शायद वह होती, तो जीवन का रास्ता कुछ और होता। मैं किसी घर की चारदीवारी में एक साधारण गृहस्थ होता, और जीवन की छोटी-छोटी खुशियों में अपना संसार खोज रहा होता। लेकिन जीवन ने मेरे लिए कोई दूसरा रास्ता चुना। तुंगनाथ की उस बर्फीली चोटी पर, जब मैंने उसकी भस्म को प्रकृति के सुपुर्द किया, तब लगा था कि मेरे भीतर का एक संसार भी समाप्त हो गया। समय के साथ समझ आया कि कुछ लोग जीवन से विदा होकर भी हमारी स्मृतियों से विदा नहीं होते। शिवांगी आज मेरे लिए कोई ऐसी स्मृति नहीं, जिसे पीछे मुड़कर केवल देखा जाए। वह उस परिवर्तन का हिस्सा है, जिसने मेरे भीतर जीवन को देखने का दृष्टिकोण ही बदल दिया। वह मेरी साँसों में है या मेरे रास्तों में-यह कहना शायद भावुकता होगी। लेकिन इतना अवश्य जानता हूँ कि उसके साथ बिताए समय और उसके बिछोह ने मेरे आज के अस्तित्व को गढ़ने में गहरी भूमिका निभाई है। और यदि मेरी कहानी पढ़कर वह किसी पाठक के हृदय में कोई संवेदना जगा सकी, तो मेरे लिए यह भी उस स्मृति का एक सुंदर विस्तार है। आपने यह भी कहा कि कहानी का पटाक्षेप कुछ अधूरा लगा। आपकी बात समझता हूँ। शायद आप उस अंतिम उत्तर की प्रतीक्षा कर रहे थे, जो कहानी के सारे प्रश्नों को सुलझा दे। लेकिन कुछ कहानियों में सारे प्रश्नों का उत्तर मिल जाना ही उनका पूरा हो जाना नहीं होता। कुछ कहानियाँ इसलिए अधूरी नहीं रहतीं कि उनका अंत नहीं मिला; वे इसलिए अधूरी रहती हैं, क्योंकि उनके बीत जाने के बाद भी उनका अर्थ हमारे भीतर खुलता रहता है। शिवांगी का जाना मेरी कहानी का अंत नहीं था। वह मेरे जीवन के एक ऐसे अध्याय का आरंभ था, जिसकी कल्पना मैंने कभी नहीं की थी। प्रेम से विरक्ति तक की इस यात्रा में मैंने खोने का दुःख भी जाना और यह भी समझा कि किसी को प्रेम करना और उसे अपने पास बनाए रखना-दो अलग बातें हैं। मैं यह नहीं कहूँगा कि वैराग्य ने मुझे उसके बिछोह का दुःख भुला दिया। शायद वैराग्य का अर्थ भूल जाना है ही नहीं। कभी-कभी इसका अर्थ होता है-उस दुःख को बिना किसी शिकायत के अपने भीतर जगह देना और फिर भी जीवन के रास्ते पर आगे बढ़ते रहना। आप सभी ने इस कहानी को जिस आत्मीयता से पढ़ा, उसके लिए हृदय से आभार। आपके प्रश्नों ने मुझे अपनी ही कहानी के उन हिस्सों की ओर फिर से देखने का अवसर दिया, जिन्हें शायद मैं कहकर भी पूरी तरह व्यक्त नहीं कर पाया था। और अंत में, आपसे एक प्रश्न… क्या किसी कहानी का पूरा हो जाना आवश्यक है, या उसका हमारे भीतर जीवित रहना ही उसकी सबसे बड़ी पूर्णता है? || ॐ नमो नारायण || #मैं_शिव_तुम_शिवांगी #मेरी_अतरंगी_कहानी
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अखंड सौभाग्य, अटूट प्रेम और अनंत समर्पण के इस पावन पर्व करवाचौथ पर सभी सुहागिन बहनों को हार्दिक शुभकामनाएँ। भगवान त्रिजुगीनारायण आप सभी के जीवन में सुख, समृद्धि, आरोग्य और आनंद की ज्योति सदा देदीप्यमान रखें।आपका दाम्पत्य जीवन स्नेह, विश्वास और सौभाग्य से सदैव आलोकित रहे।
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मोदी ने वाराणसी का विकास किया… योगी ने गोरखपुर का विकास किया… अमित शाह ने गांधीनगर का विकास किया… राजनाथ सिंह ने लखनऊ का विकास किया… अब ज़रा कांग्रेस के गढ़ अमेठी और रायबरेली का हिसाब देखिए! अमेठी में संजय गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी, राहुल गांधी और सतीश शर्मा जैसे नेताओं का दशकों तक प्रभाव रहा। फिर भी विकास के सवालों पर यह क्षेत्र बार-बार चर्चा में रहा। रायबरेली में फिरोज गांधी, इंदिरा गांधी, सोनिया गांधी, राहुल गांधी और शीला कौल जैसे नेताओं का लंबे समय तक दबदबा रहा। लेकिन वहाँ भी कांग्रेस के लंबे राजनीतिक प्रभाव के बावजूद विकास को लेकर सवाल उठते रहे। अमेठी में 59 में से 50 साल और रायबरेली में 72 में से 66 साल तक कांग्रेस का दबदबा रहा, तो फिर इन दोनों क्षेत्रों को विकास का उदाहरण बनाने का श्रेय कांग्रेस क्यों नहीं ले सकती? दूसरी तरफ, वाराणसी, गोरखपुर, गांधीनगर और लखनऊ को विकास के नाम पर पेश किया जाता है। सवाल किसी नेता के गढ़ का नहीं, जनता को मिले काम का है। गांधी परिवार ने अमेठी और रायबरेली को दशकों तक अपना राजनीतिक गढ़ बनाए रखा। अब जनता का सवाल सीधा है: इतने लंबे प्रभाव के बाद भी विकास का हिसाब देने में इतनी परेशानी क्यों? विरासत के नाम पर वोट माँगना आसान है, काम का हिसाब देना असली परीक्षा है!
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