Dr Savita retweeted
बुरे अच्छे हो जैसे भी हों सब रिश्ते यहीं के हैं ,
किसी को साथ दुनिया से कोई ले कर नही जाता ..!!
~ वसीम बरेलवी साहब 🌻
Dr Savita retweeted
बाबा बाबा
मुझे मकई के झौंरे की तरह
मरुए में लटका दो
बाबा बाबा
मुझे लाल चावल की तरह
कोठी में लुका दो
बाबा बाबा
मुझे माई के ढोलने की तरह
कठही संदूक में छुपा दो
मकई के दानों को बचाता है छिलकोइया
चावल को कन और भूसी
ढोलने को बचाता है रेशम का तागा
तुझे कौन बचाएगा मेरी बेटी!
#jamui
Dr Savita retweeted
इससे सुंदर तस्वीर क्या होगी। इससे बड़ी उपलब्धि कुछ हो सकती है? (मेरे लिए तो यही है। )उफ़्फ़! कितना सुंदर है सबकुछ। एक कविता को इतना सम्मान। अभिभूत हूँ। उत्तर प्रदेश के शामली जिले के कांधला विद्यालय से आई तस्वीर ने आज का दिन बना दिया। ❤️
Dr Savita retweeted
नरेश सक्सेना की एक कविता पढ़िए:
चीज़ों के गिरने के नियम होते हैं!
मनुष्यों के गिरने के
कोई नियम नहीं होते।
लेकिन चीज़ें कुछ भी तय नहीं कर सकतीं
अपने गिरने के बारे में
मनुष्य कर सकते हैं
बचपन से ऐसी नसीहतें मिलती रहीं
कि गिरना हो तो घर में गिरो
बाहर मत गिरो
यानी चिट्ठी में गिरो
लिफ़ाफ़े में बचे रहो,
यानी आँखों में गिरो
चश्मे में बचे रहो,
यानी शब्दों में बचे रहो
अर्थों में गिरो
यही सोच कर गिरा भीतर
कि औसत क़द का मैं
साढ़े पाँच फ़ीट से ज़्यादा क्या गिरूँगा
लेकिन कितनी ऊँचाई थी वह
कि गिरना मेरा ख़त्म ही नहीं हो रहा
चीज़ों के गिरने की असलियत का पर्दाफ़ाश हुआ
सत्रहवीं शताब्दी के मध्य,
जहाँ, पीसा की टेढ़ी मीनार की आख़िरी सीढ़ी
चढ़ता है गैलीलियो, और चिल्ला कर कहता है—
“इटली के लोगो,
अरस्तू का कथन है कि भारी चीज़ें तेज़ी से गिरती हैं
और हल्की चीज़ें धीरे-धीरे
लेकिन अभी आप अरस्तू के इस सिद्धांत को ही
गिरता हुआ देखेंगे
गिरते हुआ देखेंगे, लोहे के भारी गोलों
और चिड़ियों के हल्के पंखों, और काग़ज़ों को
एक साथ, एक गति से
गिरते हुए देखेंगे
लेकिन सावधान
हमें इन्हें हवा के हस्तक्षेप से मुक्त करना होगा...”
और फिर ऐसा उसने कर दिखाया
चार सौ बरस बाद
किसी को कुतुबमीनार से चिल्लाकर कहने की ज़रूरत नहीं है
कि कैसी है आज की हवा और कैसा इसका हस्तक्षेप
कि चीज़ों के गिरने के नियम
मनुष्यों के गिरने पर लागू हो गए हैं
और लोग
हर क़द और हर वज़न के लोग
यानी
हम लोग और तुम लोग
एक साथ
एक गति से
एक ही दिशा में गिरते नज़र आ रहे हैं
इसीलिए कहता हूँ कि ग़ौर से देखो,
अपने चारों तरफ़
चीज़ों का गिरना
और गिरो
गिरो जैसे गिरती है बर्फ़
ऊँची चोटियों पर
जहाँ से फूटती हैं मीठे पानी की नदियाँ
गिरो प्यासे हलक़ में एक घूँट जल की तरह
रीते पात्र में पानी की तरह गिरो
उसे भरे जाने के संगीत से भरते हुए
गिरो आँसू की एक बूँद की तरह
किसी के दुख में
गेंद की तरह गिरो
खेलते बच्चों के बीच
गिरो पतझर की पहली पत्ती की तरह
एक कोंपल के लिए जगह ख़ाली करते हुए
गाते हुए ऋतुओं का गीत
“कि जहाँ पत्तियाँ नहीं झरतीं
वहाँ वसंत नहीं आता”
गिरो पहली ईंट की तरह नींव में
किसी का घर बनाते हुए
गिरो जलप्रपात की तरह
टरबाइन के पंखे घुमाते हुए
अँधेरे पर रोशनी की तरह गिरो
गिरो गीली हवाओं पर धूप की तरह
इंदधनुष रचते हुए
लेकिन रुको
आज तक सिर्फ़ इंदधनुष ही रचे गए हैं
उसका कोई तीर नहीं रचा गया
तो गिरो, उससे छूटे तीर की तरह
बंजर ज़मीन को
वनस्पतियों और फूलों से रंगीन बनाते हुए
बारिश की तरह गिरो, सूखी धरती पर
पके हुए फल की तरह
धरती को अपने बीज सौंपते हुए
गिरो
गिर गए बाल
दाँत गिर गए
गिर गई नज़र और
स्मृतियों के खोखल से गिरते चले जा रहे हैं
नाम, तारीख़ें, और शहर और चेहरे...
और रक्तचाप गिर रहा है देह का
तापमान गिर रहा है
गिर रही है ख़ून में मिक़दार होमोग्लोबीन की
खड़े क्या हो बिजूके से नरेश,
इससे पहले कि गिर जाए समूचा वजूद
एकबारगी
तय करो अपना गिरना
अपने गिरने की सही वजह और वक़्त
और गिरो किसी दुश्मन पर
गाज की तरह गिरो
उल्कापात की तरह गिरो
वज्रपात की तरह गिरो
मैं कहता हूँ
गिरो।
Dr Savita retweeted
Vande Mataram
A song whose very first word evokes a surge of emotions in our hearts
📽️ Listen to what PM @narendramodi said about India's National Song in the latest episode of #MannKiBaat
#VandeMataram150
@PMOIndia @HMOIndia @MinOfCultureGoI @AshwiniVaishnaw @DrLMurugan @PIB_India @DDNewslive @airnewsalerts
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी एवं लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती के अवसर पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि।
विकास खंड कांधला
जनपद शामली।
Dr Savita retweeted
Bahut sundar lines.. 👇
दरअसल,
बेटियाँ वह दार्शनिक सत्य हैं
जो सिखाती हैं—
कि प्रेम और करुणा ही
मनुष्य की सबसे बड़ी ताक़त है।
~ सूर्यभान 'सूरी'
#daughter #daughtersday #HappyDaughtersDay #KavyaKutir
Dr Savita retweeted
हम रुखे टुकड़े खाएंगे,
भारत पर वारे जाएंगे,
हम सुखे चने चबाएंगे,
भारत की बात बनाएंगे,
हम नंगे उमर बिताएंगे,
भारत पर जान मिटाएंगे।
- सरदार भगत सिंह । जयंती विशेष
#BhagatSingh
#BhagatsinghJayanti
Dr Savita retweeted
अमर क्रांतिकारी, शहीद-ए-आज़म भगत सिंह की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन 🙏🌺
#BhagatSinghJayanti
Dr Savita retweeted
मैं मूर्तियों में नहीं
किताबों में हूँ...
मुझे पूजने की नहीं
पढ़ने की जरूरत है।
#जयभीम
Dr Savita retweeted
जो समाज अपने इतिहास को याद नहीं रखता, वह समाज कभी इतिहास नहीं बना सकता।
#Ambedkar #hindipanktiyaan
Dr Savita retweeted
अब जब भी कोई पूछता है कि
ये अम्बेडकर होता कौन है
ऐसा बोल देने वाला-
मैं बस इतना बोल पाता हूँ कि
अम्बेडकर को जानने में
पुश्तें निकल जाती हैं-
अम्बेडकर एक दिन की कैद में
आना वाला व्यक्ति नहीं है।
- किताबगंज @Kitabganj1
डॉ. भीमराव अंबेडकर
#AmbedkarJayanti
#AmbedkarJayanti2025
Dr Savita retweeted
असली शत्रु व्यक्ति के भीतर है, वो शत्रु हैं- क्रोध, घमंड, लालच, आसक्ति और घृणा । लाखों शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने से बेहतर है खुद पर विजय प्राप्त करना।
▪️भगवान महावीर
#MahavirJayanti
#mahavirjayanti2025
जैन धर्म के 24 वे तीर्थंकर भगवान महावीर के पावन जयंती की शुभकामनाएं
पहले बड़ी कक्षाओं में ही विदाई पार्टी *फेयरवेल*चलन में थी पर आज कल सब नन्हे मुन्ने सब जानते हैं । जाना अनिवार्य बेशक हो पर अपने बड़ों को वो चुपचाप नहीं जाने देंगे।🤗🤗🤗
प्राथमिक विद्यालय खंद्रावली
विकास खंड कांधला
शामली।
Dr Savita retweeted
यह हार एक विराम है
जीवन महासंग्राम है
तिल-तिल मिटूँगा पर दया की भीख मैं लूँगा नहीं।
वरदान माँगूँगा नहीं।
- शिवमंगल सिंह सुमन
Dr Savita retweeted
इतिहास गवाह है की
कोई भी वास्तविक परिवर्तन चर्चाओं से कभी नहीं हुआ।
- सुभाष चन्द्र बोस🌷
#SubashChandraBose