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उत्तर प्रदेश सरकार ने चार सरकारी मेडिकल कॉलेज—अम्बेडकर नगर, जालौन, कन्नौज और सहारनपुर में 90% आरक्षण दे रखा था।
इसके खिलाफ हाई कोर्ट में मुकदमा किया गया था, जिसमें जनरल कैंडिडेट की विजय हुई थी और कोर्ट ने इसे रद्द कर दिया था।
खुद उत्तर प्रदेश गवर्नमेंट ने कोर्ट में बोला था कि इस बार लागू करने दो, अगली बार यह नहीं लागू करेंगे।
लेकिन @myogiadityanath, @brajeshpathakup और @UPGovt ने अपना वादा तोड़ते हुए आज 2 तारीख को जो काउंसलिंग हो रही है, उसमें सीट मैट्रिक्स निकाला है।
जिसमें कुल 85 राज्य कोटा सीटों का विभाजन इस तरह से किया है:
• SC: 62 सीटें (72.94%)
• ST: 05 सीटें (5.88%)
• OBC: 11 सीटें (12.94%)
• UR (जनरल): मात्र 07 सीटें (8.24%)
यानी एससी/एसटी आरक्षण 78.82% और कुल आरक्षण 91.76% किया है, जो संविधान का खुला उल्लंघन है।
क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि किसी कीमत पर एससी, एसटी और ओबीसी तीनों का कुल आरक्षण मिलकर 50% से ज्यादा न किया जाए।
उत्तर प्रदेश सरकार ने दलील दी है कि क्योंकि यह एससी/एसटी बजट से बनता है इसलिए आरक्षण बढ़ा सकते हैं। लेकिन ध्यान से देखिए, अगर यह एससी/एसटी बजट से बना हुआ है तो इसमें ओबीसी का आरक्षण क्यों घुसेड़ा गया है?
यानी यह सिर्फ राजनीति है।
और सबसे मुख्य बात, जब हम कोर्ट में केस जीत चुके हैं, तो उसके बाद भी यह करने का मतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार सामान्य कैटेगरी को बुरी तरीके से चिढ़ा रही है।
साथ ही माननीय हाई कोर्ट लखनऊ के आदेश की अवहेलना भी कर रही है
और अपने शपथ पत्र से मुकर रही है।
दलित तुष्टिकरण में बीजेपी सरकार हर सीमा क्रॉस कर चुकी है।
एक सवाल है, अगर एससी/एसटी के लिए चार मेडिकल कॉलेज अलग से बनाए गए हैं, तो हम जनरल कैटेगरी के लिए चार मेडिकल कॉलेज क्यों नहीं बनाए जा रहे हैं?
क्या हम लोग टैक्स नहीं देते हैं? क्या इस मेडिकल कॉलेज के लिए सिर्फ एससी/एसटी से ही टैक्स वसूला जा रहा है?
ये है आदेश सीट मैट्रिक्स जो आज जारी की गई है
Special Component Plan मेडिकल कॉलेज
इनका निर्माण दलित और जनजातीय कल्याण के लिए आरक्षित विशेष फंड से हुआ था, इसलिए इनमें SC-ST श्रेणियों के लिए बहुत अधिक आरक्षण रखा गया था।
उत्तर प्रदेश में इस योजना के तहत चार सरकारी मेडिकल कॉलेज बनाए गए हैं:
राजकीय मेडिकल कॉलेज, अंबेडकर नगर
राजकीय मेडिकल कॉलेज, कन्नौज
राजकीय मेडिकल कॉलेज, जालौन
राजकीय मेडिकल कॉलेज, सहारनपुर
इन चारों मेडिकल कॉलेजों की कुल सीटों में से 70% सीटें अनुसूचित जाति (SC) के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित की गई थीं।
अन्य कोटे को जोड़कर आरक्षण का प्रतिशत 80 से 90 तक पहुँच जाता है।
इस साल की काउंसिलिंग में चारों मेडिकल कॉलेजों की कुल 85-85 स्टेट कोटा सीटों का आवंटन इसी पैटर्न पर हो रहा है।
यह व्यवस्था फिलहाल अस्थायी और अंतरिम है। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में सरकार द्वारा दायर की गई स्पेशल अपील पर सुनवाई अभी लंबित है। इस वर्ष के नोटिफिकेशन में साफ लिखा है कि इन कॉलेजों में दाखिले अदालत के अंतिम फैसले के अधीन ही माने जाएंगे।
Sep 4, 2026 · 8:18 AM UTC




