जिसको चाहा उसी ने ग़म दिया
हमको मेरी हर खुशी ने ग़म दिया
मैं तुम्हें ही याद करके रो पड़ा
जब सफ़र में अजनबी ने ग़म दिया.....
मैं कब से हूं कितना तन्हा ,तुझे पता भी नहीं
कभी गिला था हमें उनसे अब तो गिला भी नहीं
कभी ये लगता है अब खत्म हो गया सब कुछ
कभी ये लगता है अब तक तो कुछ मिला भी नहीं
मैं लौटने के इरादे से जा रहा हूं
मगर सफ़र तो सफ़र है इंतजार मत करना
हमारी राह में कलियां नहीं है कांटे है
हमारी राह कभी इख्तियार मत करना .....






