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-कितना हास्यास्पद लगता है ना की जब एक मुस्लिम महिला अपने शौहर को तीन-तीन सौतनों के साथ शेयर करती है,
-उसके लिए दर्जनों बच्चे पैदा करती है
-45 डिग्री गर्मी में ख़ुद को काले टेंट (बुर्के) में जकड़ कर रखती है,
-हलाला के नाम पर मियाँ भाई द्वारा ससुर- देवर-जेठ-मुल्ला-मौलवी और मौलानाओ के बिस्तर पर सेक्स-ऑब्जेक्ट की तरह भेजी जाती है,
-जिसे उसकी आसमानी किताब में “खेती” के रूप में प्रस्तुत किया गया है, “मुस्लिम पुरुष जितना मर्जी उतना जौते ऐसा माना गया है”
वो हाथ में डफली लेकर, हिजाब-बुर्के पहन कर, कितनों से हलाला करवा कर अपनी सौतनों के साथ “ब्राह्मणवाद से आज़ादी” के नारे लगा रही है।😂😂😂
Even irony would commit suicide 786*72 times 🤦🏻♀️
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मुंतशिर साहब, गीत भले गली-गली बज रहे हों, पर "देश का बच्चा-बच्चा गाता है" वाली दलील से गीत की गुणवत्ता तय नहीं होती। "चलो हनुमान चालीसा" भी हर गली में बजती है, फ़र्क़ इतना है कि वो किसी की लिखी नहीं, श्रद्धा से पीढ़ियों में बनी है। भीड़ का गाना और कवि की कला, दोनों अलग चीज़ें हैं।
और जो आदमी कहे "फ़िल्म ख़राब थी, संवाद और भी ख़राब थे", उसे याद दिलाना पड़ेगा कि वो संवाद भी आप ही के थे। यानी आधा दोष मानकर बाक़ी का श्रेय पूरा माँग रहे हैं। "अनगिनत बार माफ़ी माँगी" कहकर "अब चैलेंज मत करो" कहना माफ़ी नहीं, माफ़ी की आड़ में आलोचना बंद करवाने की कोशिश है।
"न नर्सरी राइम्स लिखीं, न क़व्वालियाँ" वाली लाइन में तंज़ तो है, पर किस पर? आलोचकों पर? दर्शकों पर? जिन्होंने रामायण के गीतों से तुलना की, उन्होंने बस इतना पूछा था कि जब सामने इतनी ऊँची लकीर खिंची हो, तो अपनी लकीर कहाँ है। जवाब में "लोग समझदार हैं, जानते हैं कौन कितने पानी के है" कह देना ख़ुद पर ही सवाल उठवा देता है, क्योंकि समझदार लोगों ने तो अपना फ़ैसला पहले ही सुना दिया था।
कुल मिलाकर: आलोचना सुनने का साहस माफ़ी माँगने से बड़ा होता है, और वो यहाँ कम दिखा।
#करवा_चौथ
#करवाचौथ
#KarwaChauth
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प्रोफेसर बनने के लिए सवर्ण को लाने होंगे 100% और scst को लाने होंगे 3% इससे अच्छा तो राजतंत्र था।
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शरीर के इन 16 लक्षणों को नज़रअंदाज़ करना पड़ सकता है भारी!
1. कमर के निचले हिस्से में लगातार दर्द = किडनी या मांसपेशियों से जुड़ी समस्या हो सकती है।
2. बिना वजह बहुत ज़्यादा थकान = एनीमिया या थायरॉइड की समस्या हो सकता है।
3. उंगलियों में सुन्नपन = नस दबने या विटामिन B12 की कमी से हो सकता है।
4. पैरों के तलवों में जलन = डायबिटीज़ या नसों को नुकसान होने से जुड़ी हो सकती है।
5. आंखों का सफेद हिस्सा पीला पड़ना = लिवर या पित्त की नलियों से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है।
6. बार-बार पेशाब आना = डायबिटीज़ या पेशाब से जुड़ी किसी समस्या के कारण हो सकता है।
7. टखनों में सूजन = दिल, किडनी या ब्लड सर्कुलेशन से जुड़ी समस्या हो सकती है।
8. Skin में लगातार खुजली होना = त्वचा की समस्या या कभी-कभी लिवर और किडनी की बीमारी से जुड़ा हो सकता है।
9. पेशाब में खून आना = किडनी स्टोन, इन्फेक्शन या यूरिनरी ट्रैक्ट की दूसरी समस्याओं का संकेत हो सकता है।
10. बहुत ज़्यादा प्यास लगना = डायबिटीज़ या शरीर में पानी की कमी के कारण हो सकता है।
11. त्वचा का पीला या फीका पड़ना = खून की कमी या किसी दूसरी बीमारी का संकेत हो सकता है।
12. पेट में लगातार फूलना या भारीपन रहना = पाचन तंत्र से जुड़ी समस्या हो सकती है।
13. बिना कोशिश के वज़न कम होना = थायरॉइड, पाचन तंत्र या किसी दूसरी बीमारी से जुड़ा हो सकता है।
14. मांसपेशियों में कमज़ोरी = शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का असंतुलन या नसों से जुड़ी समस्या हो सकती है।
15. हल्की चोट में भी आसानी से नीले निशान पड़ना = कुछ दवाओं के असर या खून से जुड़ी समस्या के कारण हो सकता है।
16. रात में लगातार बहुत पसीना आना = इन्फेक्शन, दवाओं के असर या किसी दूसरी मेडिकल समस्या से जुड़ा हो सकता है।
याद रखें: इन लक्षणों का मतलब हमेशा कोई गंभीर बीमारी होना नहीं है। लेकिन अगर कोई लक्षण लगातार बना रहे, बार-बार हो या बिना किसी स्पष्ट कारण के दिखाई दे, तो डॉक्टर से सलाह लें।
समय पर लक्षणों को पहचानना और सही जाँच करवाना आपकी सेहत के लिए बेहद ज़रूरी है।
आपको इनमें से कौन-सा लक्षण दिखाई दे रहा है?
COMMENT में बताइए
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*विनम्र अपील*
*अपने राष्ट्रवादी परिवार से*
*परिवार के साथ बाहर निकलें*
*बाजारों में रौनक लौटायें*
*अपने शहर के बाजारों में उमंग के दीप जलायें*
*ऑनलाइन खरीददारी न करें*
*डीप स्टेट की कंपनियों को फायदा ना पहुँचाये*
*अपनो से खरीदो तो अपनो को फायदा होगा*
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अमिताभ जैसा अभिनेता किसी धर्म को नहीं मानता,
पर नसीरूद्दीन अपने धर्म को लेकर फिक्रमंद है,
बस यही हिंदू धर्म का दुर्भाग्य है..!!
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अभी भी सवर्णों की आंखे अगर नहीं खुलती है तो वो अपनी नसबंदी करवा ले ताकि वो खुद सा कायर औलाद पैदा न कर सके।
खून तक बेच के पढ़ रहे है सवर्ण के बच्चे।
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आप लोगों ने उपकार फिल्म का यह गीत कसमे वादे प्यार वफा सब वादे हैं वादों का क्या कई बार सुना होगा
लेकिन आप यह जानकर चौक जाएंगे कि इस फिल्म की अंतिम अंतरा कांग्रेस सरकार के सेंसर बोर्ड ने काट दिया था क्योंकि अंतिम अंतरे में भारत के मंदिरों के तोड़ने की सच्चाई थी
आप वह अंतिम अंतरा सुनिए जिसे काट दिया गया था
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Hello @MinistryWCD @KanoongoPriyank @PIBWCD @NCPCR_
कृपया संज्ञान ले, इन नाबालिक बच्चों को नवबौद्ध भिक्षुओं के चंगुल से आजाद करवाए। इनकी पढ़ने लिखने की उम्र में इनसे भीख मंगवाने के लिए तैयार किया जा रहा है। जबकि देश के हर बच्चे को Right to Education का अधिकार है। जो इनसे छीना जा रहा है।
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आप किसी भी जाति, वर्ण के हों, आपके गाँव में आपके कुल देवता/ग्राम देवता की डीह होगी। मन्दिर न हो तो कम से कम देवस्थान अवश्य होगा। पहले वहाँ आपकी ही जाति के पुजारी, भगत आदि होते थे। पता कीजियेगा, क्या अब भी वहाँ कोई भगत है? तनिक याद कीजिये, वहाँ अंतिम बार आपके घर से कब भोग चढ़ाया गया था? सम्भव है वर्षों बीत गए हों। सम्भव है आपको वहाँ गए दसियों वर्ष बीत गए हों। यह भी सम्भव है कि आपको इसके सम्बंध में कोई जानकारी ही न हो। है न?
गाँव में मन्दिर के निर्माण के लिए चंदा लगता है तो हम सभी अपने सामर्थ्य अनुसार दान करते हैं। मन्दिर में किसी आयोजन के लिए भी चंदा दिया जाता है। पर याद कीजिये, मन्दिर में रोज लगाए जाने वाले भोग के लिए आपने अंतिम बार कब पैसे दिए थे? याद है?
आपको पता भी है कि आपके गाँव वाले मन्दिर के पुजारी को कोई वेतन भी दिया जाता है या नहीं? आपने अंतिम बार उन साधु-पुजारी को कब पैसे दिए थे?
शहर के मंदिरों की दशा लगभग ठिक है, पर गाँव के अधिकांश मन्दिर अब धीरे धीरे खाली होते जा रहे हैं। पहले साधू होते थे और वे निःस्वार्थ भाव से मन्दिर की सेवा करते थे। हम दो हमारा एक वाले समय में अब कौन बन रहा है साधु? तो मंदिरों की व्यवस्था के लिए अब साधु के स्थान पर पुजारी रखना पड़ रहा है। पर अधिकांश ग्रामीण मंदिरों में इतनी भी आय नहीं कि ठिक से भोग लग सके। पुजारी का वेतन तो भूल जाइए। रख रखाव और दैनिक खर्च का जुगाड़ करना कठिन हो रहा है। अब सोचिये! इनका ध्यान कौन रखेगा?
तनिक घूम कर देखेंगे तो पाएंगे कि ग्रामीण क्षेत्र के असंख्य मंदिरों में कोई पुजारी तक नहीं है। कौन करेगा? हमारे आपके पास समय है नहीं। ब्राह्मणों ने पिछले साठ सत्तर साल में इतनी गाली सुन ली कि अब कोई पुरोहिती करना नहीं चाहता, मन्दिर पर रहने को तो भूल ही चाहिए। पुजारी बनने का अधिकार मांगने वाले केवल फेसबुक पर बोलते हैं, उन्हें पुजारी बनना नहीं है। बनना होता तो लाखों मन्दिर खाली है, कहीं चले जाते...
जो लोग मूल गाँव छोड़ कर शहरों में बस गए उनसे उनके कुलदेवता की डीह छूटी, ग्राम देवता छूटे, काली-माई, बरम बाबा छूटे। उन देव स्थानों की ओर कभी मुड़ कर देखने का भी समय नहीं, और हमें लगता है कि हम जगे हुए हिन्दू हैं।
जितना मैं समझ पा रहा हूँ, श्रद्धा से अपने गाँव के मन्दिर पर जा कर घण्टे भर बैठने से अच्छी तीर्थयात्रा कोई नहीं। यदि आप उस छोटे मन्दिर की व्यवस्था सुधारने में अपना योगदान दे रहे हैं तो जैसे बहुत बड़ा यज्ञ कर रहे हैं। महीने में एक बार भी मन्दिर का भोग अगर हमारे पैसे से होने लगे तो हम स्वयं को जगा हुआ हिन्दू कह सकते हैं। अपने गाँव जवार के किसी जीर्ण मन्दिर का उद्धार करा दिए, किसी ग्रामदेवता की डीह पर पूजा की परम्परा शुरू करा दिए तो वही बदरी केदार है भाई साहब!
ढोल गाँव के मन्दिर पर भी बजना चाहिये महाराज! ईश्वर वहाँ भी हैं।
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ये इनका धर्म/मजहब पैसे कमाने वक़्त क्यो नहीं आता???
BOYCOTT THEM….
हिंदुओं से निवेदन है कि अपने त्योहारों में अपने लोगो को ही 2 रुपया कमाने का मौका दे ।🙏🏻
LOCATION:-
SHIPRA SRISHTI,INDIRAPURAM,
GHAZIABAD NEAR HBITAT CENTER .
#teej #hindu #muslim @ghaziabadpolice @Uppolice @myogiadityanath @BJP4UP #indirapuram #ghaziabad
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थू है
ऐसे मनहूसों पर
जिनके राज में हमारे मासूम बच्चे खून बेच कर फीस भर रहे हैं
ऐसे बनेंगे हम विश्वगुरु 😡
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#यह_समाधि_गवाह_है_योद्धाओं_के_अपमान_की
#बाबर के ऊपर मौत बन कर टूटे और हिंदुत्व की रक्षा के लिए 80 घाव खा कर भी अंतिम सांस तक लड़ते रहने वाले #महायोद्धा #रणासांगा की समाधि की ये दुर्दशा। यह समाधि राजस्थान के दौसा जिले के बसवा गाँव में रेलवे लाइन के एक तरफ स्थित है। चित्र को
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असीम अन्याय का अंत कैसे होगा ?
खून बेचकर सवर्ण कोचिंग की फीस भर रहे है क्योंकि सवर्ण बच्चों की शिक्षा से सरकार ने पूरी तरह से मुंह मोड़ लिया है।
और सवर्ण ९०% लाकर भी एडमिशन नहीं पा रहा वही आरक्षित को कोई फीस नहीं देनी, और नंबर भी नहीं लाने
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Sc St Act के दुरुपयोग पर रोक | Ugc Roll Back
जितनी देरी उतना नुकसान - Rt | Copy Paste
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👉🏽 राजनीति में बड़ा विचित्र और ओछा चलन चला है सारी क्रांति केवल और केवल सनातन और हिंदुत्व के साथ ही करनी है बाकी इस्लाम हो क्रिश्चियनिटी या कोई दूसरा मत मजहब हो उस सब पर होंठ सिल लेने है।
सारी खुरापात सारे खुरपेंच सनातन के साथ करनी है और वह भी माइक पर करनी है, मंच पर करनी है।
जो कमजोर तुष्टीकरण प्रेरित नेता इस्लाम पर एक शब्द बोलने में जिनके ह्रदय की हृदयगति ऊपर नीचे होने लगे वो भी हिंदुत्व को लेकर बड़े बड़े भाषण झाड़ रहे हैं, अल्ल, बल्ल, टल्ल बोले जा रहे हैं।
क्या ऐसे लोग समाज और राष्ट्र की संस्कृति, उन्नति की हित के परिचायक हो सकते हैं.???? 😡😡
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अगर चिन अरुणाचल प्रदेश की सीमा में घूंस रहा है तो भीम आर्मी को चिन से लड़ने की लिए बॉर्डर पर भेजा जाए ये किस काम के है सिर्फ आरक्षण लेने के लिए कभी तो देश के काम आओ।
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☝️आप कश्मीर में जो कुछ भी हो रहा है उसके लिए पाकिस्तान को दोषी ठहरा सकते हैं***
☝️लेकिन 99.99% दोष कश्मीर के उन गद्दारों का है जो पाकिस्तान से आने वाले आतंकवादियों के लिए खाना, रहना, सुरक्षा, S&X, भोजन आदि की व्यवस्था करते हैं 👁️👁️
#IWA 👁️👁️
badhai hii @PMOIndia desh ik ik hisse ki janta unke aaradhy unke dhram ko bar bar har trah se apmanit karne ka
हिन्दुओं के त्यौहार का सीजन चल रहा है, दिवाली आने वाली है और ऐसे में हिन्दुओं 33 कोटि देवी देवताओं को गाली दी जा रही है, मोदी एक्ट का जलवा है, ऐसा मैं नहीं कह रहा बल्कि भगवान की लीला कह रही है, टाइमलाइन पर यह वीडियो दिखा और इसके ठीक नीचे सरकारी पोस्ट दिखी, जिसमें Modi Act (SCST Act) का बखान किया जा रहा है, और ऐसे लोगों को संरक्षण देने की बात लिखी है, सब भगवान की माया है























