@AnishView
Bihar
Joined May 2017
1,000 FAKE EWS ADMISSIONS. 200 DELHI SCHOOLS. A 2015 Delhi Police investigation reported forged income/residence documents and alleged crores in transactions. When fake poverty gets a seat, genuine poverty loses the chance. #EWSReservationHatao #SocialJustice
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कॉन्ट्रैक्ट बेस पर नौकरी जाति आधार पर मिलेगी या आर्थिक आधार पर l
जो दलित OBC BJP को वोट दे रहे है, उन्हें इस खबर को गंभीरता से देखना चाहिए। SBI में कुछ पदों पर कॉन्ट्रैक्ट आधारित भर्ती की जा रही है। अगर नियमित सरकारी नौकरियों की जगह ऐसी व्यवस्था बढ़ती गई, तो आरक्षण और सामाजिक प्रतिनिधित्व के सवाल भी गंभीर हो जाते हैं। आज अगर आप चुप रहे, तो कल आपके बच्चों के लिए सरकारी नौकरी के अवसर और सामाजिक न्याय की लड़ाई दोनों कमजोर हो सकते हैं। इनकी सलेक्शन जाति देख कर कि जाएगी या फिर आर्धिक आधार पर। इनकी सलेक्शन जाति देख कर कि जाएगी।
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जातिवार जनगणना: गिनती सही होगी, तभी हिस्सेदारी का हिसाब सही होगा: भारत में जातिवार जनगणना अब केवल जातियों की संख्या जानने का विषय नहीं है। यह सामाजिक न्याय, समान अवसर, प्रतिनिधित्व और बेहतर नीति निर्माण से जुड़ा सवाल है। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है कि क्या गिनती सही और वैज्ञानिक तरीके से होगी? लोकतंत्र में आंकड़े नीतियों की बुनियाद होते हैं। योजनाएं, बजट और सामाजिक-आर्थिक नीतियां प्रमाणिक आंकड़ों के आधार पर ही प्रभावी बन सकती हैं। इसलिए जातिवार जनगणना केवल संख्या गिनने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि न्यायपूर्ण नीति निर्माण का आधार होनी चाहिए। सवाल केवल जनगणना का नहीं, सही जनगणना का है: भारत की जातीय संरचना बेहद विविध है। एक ही जाति के अलग-अलग क्षेत्रों में अलग नाम, पहचान और वर्तनी हो सकती है। इससे डेटा में दोहराव और भ्रम पैदा हो सकता है। विशेष रूप से OBC की सही गणना के लिए स्पष्ट OBC कॉलम, मानकीकृत जाति सूची और डिजिटल Drop-down Menu जैसी व्यवस्था जरूरी है। साथ ही डेटा के सत्यापन और स्वतंत्र ऑडिट की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि अंतिम आंकड़े विश्वसनीय हों। OBC की सही संख्या क्यों जरूरी है? OBC की वास्तविक आबादी को लेकर लंबे समय से विभिन्न अनुमान सामने आते रहे हैं। प्रमाणिक और अद्यतन आंकड़ों के अभाव में शिक्षा, रोजगार और संस्थागत प्रतिनिधित्व में OBC की स्थिति का सही आकलन कठिन है। जातिवार जनगणना इन बहसों को अनुमान से निकालकर तथ्यों और प्रमाणिक आंकड़ों पर ला सकती है। ये आंकड़े अपने आप किसी नीति या आरक्षण का प्रतिशत तय नहीं करते, लेकिन बेहतर नीति निर्माण के लिए मजबूत आधार जरूर देते हैं। जातिवार जनगणना समाज को नहीं बांटती: जाति भारतीय समाज की ऐतिहासिक वास्तविकता है। उसे आंकड़ों में दर्ज करने से वह वास्तविकता पैदा नहीं होती। असमानता को पहचानना और असमानता पैदा करना दो अलग बातें हैं। जातिवार जनगणना का उद्देश्य किसी जाति को बड़ा या छोटा साबित करना नहीं, बल्कि देश की सामाजिक वास्तविकता को प्रमाणिक रूप से सामने लाना होना चाहिए। असली परीक्षा आंकड़ों के बाद: जनगणना पूरी होना अंत नहीं, बल्कि शुरुआत होगी। असली सवाल यह होगा कि इन आंकड़ों का इस्तेमाल कैसे किया जाता है। क्या शिक्षा और रोजगार की नीतियों की समीक्षा होगी? क्या संस्थानों में प्रतिनिधित्व का अध्ययन होगा? क्या पिछड़े समूहों के लिए लक्षित नीतियां बनाई जाएंगी? यदि आंकड़े केवल प्रकाशित होकर रह गए और नीति निर्माण में उनका इस्तेमाल नहीं हुआ, तो पूरी प्रक्रिया अधूरी रह जाएगी। पारदर्शिता सबसे जरूरी: जातिवार जनगणना में यह स्पष्ट होना चाहिए कि डेटा कैसे जुटाया गया, जातियों का वर्गीकरण किस आधार पर हुआ, गलत प्रविष्टियों को सुधारने की व्यवस्था क्या है और अंतिम आंकड़ों का सत्यापन कैसे किया गया। डिजिटल डेटा संग्रह, मानकीकृत जाति सूची, Drop-down Menu और बहु-स्तरीय सत्यापन प्रक्रिया को अधिक सटीक और पारदर्शी बना सकते हैं। भारत के सामने अपनी सामाजिक संरचना की वास्तविक तस्वीर सामने लाने का महत्वपूर्ण अवसर है। लेकिन इसके लिए गणना वैज्ञानिक, पारदर्शी और विश्वसनीय होनी चाहिए। क्योंकि सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कौन कितने हैं। सवाल यह भी है कि कौन कहां खड़ा है, उसकी भागीदारी कितनी है और समान अवसर तक उसकी पहुंच कितनी है। सही आंकड़े → सही सवाल → सही नीति → न्यायपूर्ण हिस्सेदारी। इसलिए जातिवार जनगणना की मांग का सार स्पष्ट है, गिनती सही होगी, तभी हिस्सेदारी का हिसाब सही होगा।
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गार्गी और मैत्रयी विदुषी कब और किस सदी में पढ़ाई की थी और क्या पढ़ाई की थी? कौन सा ऐतिहासिक सबूत मिला है इनका या काल्पनिक कथा कहानी कि तरह बिना किसी सबूत के कागज वीर बना दिए? ब्राह्मण/ब्राह्मणवादियों के सारे सबूत काल्पनिक ही क्यो होते है? वैदिक काल का कोई सबूत नहीं मिला न ही ब्राह्मण संप्रदाय में महिलाओं के पढ़ने का सबूत मिला लेकिन गपोड़े तलवा लो इनसे। 11 वी सदी में अलबरूनी ने लिखा ब्राह्मण वेद पढ़ने खेतों में चले जाते है क्योकि स्त्रियो को वेद सुनने का निषेध था। मनुस्मृति लिखता है स्त्रियों को मंत्रों की शिक्षा नहीं देनी चाहिए और न ही उनका संस्कार मंत्रों से करना चाहिए।
क्या आप इतिहास पढ़ रहे हैं, या इतिहास का नैरेटिव? विकास दिव्यकीर्ति के एक वायरल बयान ने इतिहास, मनुस्मृति और प्राचीन भारत में शिक्षा को लेकर बहस छेड़ दी है.. लेकिन बहस बयान पर नहीं..तथ्यों पर होनी चाहिए..अगर उस दौर में महिलाओं के लिए ज्ञान के दरवाज़े बंद थे, तो गार्गी और मैत्रेयी जैसी विदुषियां इतिहास में आईं कहां से? अगर हजारों वर्षों तक सत्ता और शिक्षा सिर्फ एक वर्ग के हाथ में थी, तो इतिहास में दूसरे सामाजिक वर्गों से आए शासकों और राजवंशों की पूरी कहानी क्या है? विरोध करने से पहले पढ़ना… और मानने से पहले सवाल करना..यही इस वीडियो की असली कहानी है... पूरा वीडियो देखिए...फिर तय कीजिए…इतिहास सच में इतना सीधा है, जितना हमें बताया जाता है? #manusmriti #virałpost @VikasDivyakirti @drishtiias @INCIndia @BJP4India
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पटना की धरती से आरक्षण बढ़ाओ और न्यायलयों में कॉलेजियम सिस्टम समाप्त करो आंदोलन शुरू हो गया है, 🔥🔥 CJI सूर्यकांत शर्मा ने नए UGC रेगुलेशन पर स्टे लगाकर तमाम OBC SC ST समुदाय को भड़का दिया है, UGC रेगुलेशन लागू ना होने से सबसे ज्यादा नुकसान OBC समुदाय को ही हो रहा है, NFS लगाकर उनको रोका जा रहा है, इंटरव्यू में कम मार्क्स दिए जा रहे हैं, भेदभाव किया जा रहा है, अब भारत की भूमि पर 85% बहुजन सड़को पर उतरेगा, सामाजिक न्याय से समझौता नहीं होगा, 🔥🔥
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पिछले वर्ष मैने आगाह किया था अब परिणाम आपके सामने है। पहले कठिन पेपर बनाएंगे। 1/3 माइनस मार्किंग करेंगे। SC/ST/OBC/MBC पोस्ट का बैकलॉग बनेगा। फिर बैकलॉग की अवधि समाप्त होने पर इन पोस्ट को सामान्य वर्ग में बदला जाएगा। अब पेपर सरल बन रहा है। चोर दरवाजे से ऐसे आरक्षण खत्म हो रहा है।
SC/ST/OBC के हक ओर अधिकारों पर ऐसे डाका डाला जाता है। 👇 पहले पेपर कठिन ओर 1/3 माइनस मार्किंग की जाती है। फिर कुल प्रश्नों के 10% से अधिक प्रश्नों में कोई भी गोला नहीं भरने पर सीधा अयोग्य घोषित। अब 3 भर्ती की यह खाली सीटे सरल पेपर करके सामान्य को दी जाएगी। बैकलॉग ओर आरक्षण खत्म।
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ओबीसी क्रीमी लेयर 1993 में 1 लाख रुपये, 2004 में 2.5 लाख हुई, 2008 में 4.5 लाख रुपये, 2013 में 6 लाख रुपये, 2017 में 8 लाख रुपये हुई लेकिन अब, 2026 me 9 साल देरी हो चुकी है लेकिन OBC क्रीमी लेयर की इनकम संशोधन नहीं हुआ,जो OBC के साथ नाइंसाफी है। -Adv Chandrashekhar (MP, Nagina)
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भाजपा ने जाति जनगणना का ऐलान तो कर दिया, लेकिन OBC की सही गिनती का रास्ता ही बिगाड़ दिया। सूची और कोडिंग मौजूद होने के बावजूद Open-ended तरीका चुना गया, जिससे जातियों का डेटा बिखरने का खतरा है। OBC समझे - यह तकनीकी चूक नहीं, भाजपा की पूरी साज़िश है।
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सभी OBC/SC/ST जागरूक होकर हर स्थिति को देखिए। जागरूकता से वास्तविकता दिखती है और वास्तविकता से समाधान का रास्ता निकलता है। जहाँ आरक्षण है, वहाँ हमारा प्रतिनिधित्व कितना है और जहाँ नहीं वहाँ कितना है l —यह देखना जरूरी है। यही दिखाता है कि आरक्षण कितना जरूरी है। ✊📚
अरे कहाँ हैं भाई OBC-SC-ST?
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25 important issues for the SC/ST/OBCs in the coming decade (1) 50% reservation to be implemented in IIT,IIM, 45 central universities faculty and administrative staff at all levels (2) 50% reservation in secretary, additional secretary and joint secretaries to government of India (3) Private sector reservation (4)Reservation in lateral entries (5) Reservation in outsourced staff and temporary jobs (6) Revamp of 13 point roster with dynamic rosters to enable real time vacancies to be published on a national dashboard with a time line fixed for each vacancies (7) Many places sanctioned posts are not at 50%, All the posts should be realigned and first priority should be given to fill SC/ST/OBC (8) Removing "Not Found Suitable" criteria and recruiting based on minimum qualifications criteria to ensure 50% is achieved (9) Blanket ban on dereservation in any organisation (10) 50% reservation in cabinet and key positions to be given to SC/ST/OBC members (11) 50% reservation for all office bearers in all political parties with representation from SC,ST,OBCs (12) Subcategorization of OBCs into four set so as to ensure equitable distribution of resources. Economic criteria is not needed. Only social and educational backwardness should be considered (13) Subcategorisation of SC/ST into backward and most backward SC/ST to be undertaken (14) Dalit Muslims,Dalit Christians, Pasmanda Muslims reservation - A fixed percentage may be 6% to 8% to be given (15) Reservation to be provided in top private universities like BITS, VIT etc where there is no reservation norms followed (16) Reservation to be provided in Ph.D. and scholarships for foreign universities. Tie ups with Harvard,Stanford to consider admission based on caste as protected class. (17) Redistribution of land and introducing collective farming with a intention of providing fixed income to SC/ST farmers. Most of the farmers are landless and they need to be incentized to get fixed income and not be left at the mercy of land owners (18) Large new settlements in urban areas where high rises and small apartments of sizes 600 sq ft to be build for sc/st to pull them out of villages and make there kids study in cluster schools and make them employable (19) Nudging private sector to employ more and more sc/st/obc freshers by giving them tax incentives with an assured employment of three years (20) Priority allotment of industrial lands,sites to SC/ST/OBCs (21) Grant free lands for SC/ST/OBCs to run their own educational institutions (22) Setting up 100 Bhim KV schools in dalit dominated area to provide quality education (23) SC/ST funds allocated and used for only creating direct benefits and assets (24) Minimizing SC/ST funds for general use (25) Reservation in Judiciary at all levels So, a small set of 25 requests which will change the lives of 80% of the Indian population
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Tomorrow 18 Sept, Special Press Briefing by the Leader of Opposition in Lok Sabha, Shri Rahul Gandhi at 10 am at Indira Bhawan Auditorium. Media is requested to be seated by 9.30 am. कल दिनांक 18 सितम्बर को सुबह 10 बजे इंदिरा भवन ऑडिटोरियम में लोक सभा में नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी की विशेष प्रेस वार्ता। पत्रकारों व छायाकारों से आग्रह है कि वे प्रातः 9.30 बजे तक अपना स्थान ग्रहण करें।
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समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं को हिम्मत का दाज देना पड़ेगा! करो सभी फटाफट रीट्वीट 🔥 #राष्ट्रीय_बेरोजगार_दिवस
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आइए आज हड़पियों का प्रोपेगेंडा Exposed करते हैं 🚨 UR is Not General It's Open Category 1️⃣ EWS आरक्षण के समय भी यही खेल हुआ था – अब सुप्रीम कोर्ट के ताज़ा आदेश को तोड़-मरोड़ कर षड्यंत्र रचा जा रहा है। 2️⃣ सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा है – आरक्षित वर्ग का कोई भी उम्मीदवार अगर Age Relaxation और Extra Attempts ले चुका है, तो अधिक अंक लाने पर भी उसे UR सीट नहीं मिलेगी,यदि यह फायदे नहीं लेता है तो वह UR की सीट के लिए Eligible है 3️⃣ ये नियम पहले से ही लागू हैं – इसमें कुछ नया नहीं है, लेकिन इसे नया प्रोपेगेंडा बनाकर फैला रहे हैं। 4️⃣ झूठा नैरेटिव गढ़ा जा रहा है – यह दिखाया जा रहा है कि अब 50% सीट General के लिए आरक्षित हो गई हैं और 50% OBC सिर्फ 27% तक सीमित रह जाएंगे। 5️⃣ OBC को छेड़ना और उकसाना भारी पड़ेगा वह अपने 50% आरक्षण की लड़ाई और मज़बूती से लड़ेगा। #आरक्षण_चोर #हिस्सेदारी_चोर @KraantiKumar @rajkumarbhatisp @DrJaihind @DrLaxman_Yadav @masijeevi @SamarRaj_ @FactdiaryIn @TheNewsBeak
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"EWS आरक्षण का लाभ सिर्फ सामान्य वर्ग को देना अन्याय" अनुच्छेद 16(4) पिछड़ेपन और कम प्रतिनिधित्व वालों को आरक्षण देने के लिए है। ये न पिछड़े हैं, न दरिद्र है! हर जगह 50% से ज्यादा जगह पहले से घेरकर बैठे हैं। @TejashwiYdvRJD @priyanka2bharti @PratikVoiceObc
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EWS आरक्षण कब और कैसे लागू हुआ समझिए!👇 —————————————————— 103वाँ संविधान संशोधन अधिनियम 12 January 2019 भारत का संविधान 1950 (COI) परिचय – 103वें संविधान संशोधन अधिनियम,2019 ने समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई। इस अधिनियम द्वारा भारत के संविधान,1950 (COI) में “नागरिकों के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग” शब्द को शामिल किया गया है। संशोधन का विधायी इतिहास — सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने लोकसभा में संविधान 124वाँ संशोधन विधेयक, 2019 में प्रस्तुत किया। लोकसभा में लोकसभा में 325 सदस्यों ने पक्ष में मतदान कर विधेयक पारित किया। इसके बाद इसे राज्य सभा द्वारा पारित कर दिया गया, जिसमें 165 सदस्यों ने इसके पक्ष में मतदान किया। संविधान 103वाँ संशोधन अधिनियम,2019 को 12 जनवरी 2019 को राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त हुई तथा यह 14 जनवरी 2019 को लागू हुआ। 103वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा प्रस्तुत संशोधन — 103वें संविधान संशोधन अधिनियम के माध्यम से निम्नलिखित अनुच्छेद जोड़े गए:- अनुच्छेद 15 (6) जोड़ा गया जिसमें प्रावधान किया गया कि इस अनुच्छेद या अनुच्छेद 19 (1) (g) या अनुच्छेद 29 (2) का कोई भी उपबंध राज्य को ऐसा करने से नहीं रोक सकती। खंड 4 एवं 5 में उल्लिखित वर्गों के अतिरिक्त नागरिकों के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की उन्नति के लिए कोई विशेष उपबंध तथा खंड 4 एवं 5 में उल्लिखित वर्गों के अतिरिक्त नागरिकों के किसी भी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की उन्नति के लिए विशेष प्रावधान – जहां तक ऐसे विशेष प्रावधान, निजी शैक्षणिक संस्थानों सहित शैक्षणिक संस्थानों में उनके प्रवेश से संबंधित हैं, चाहे राज्य द्वारा प्राप्त हो या नहीं, अनुच्छेद 30 के खंड (1) में निर्दिष्ट अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों के अतिरिक्त, जो आरक्षण के मामले में मौजूदा आरक्षण के अतिरिक्त होगा तथा प्रत्येक श्रेणी में कुल सीटों के अधिकतम दस प्रतिशत के अधीन होगा। स्पष्टीकरण- इस अनुच्छेद एवं अनुच्छेद 16 के प्रयोजनों के लिये, "आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग" वे होंगे जिन्हें राज्य द्वारा समय-समय पर पारिवारिक आय एवं आर्थिक असुविधा के अन्य संकेतकों के आधार पर अधिसूचित किया जा सकेगा।' अनुच्छेद 16 (6) जोड़ा गया जिसमें यह प्रावधान किया गया कि इस अनुच्छेद का कोई उपबंध राज्य को विद्यमान आरक्षण के अतिरिक्त तथा प्रत्येक श्रेणी में पदों के अधिकतम दस प्रतिशत के अधीन, खंड (4) में उल्लिखित वर्गों के अतिरिक्त नागरिकों के आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों के पक्ष में नियुक्तियों या पदों के आरक्षण के लिये कोई प्रावधान करने से नहीं रोकेगी। आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग का लाभ का पात्र कौन हो सकता है?— 👉वे व्यक्ति जिनकी वार्षिक सकल घरेलू आय 8 लाख रुपए तक है। निम्नलिखित लोग आरक्षण का लाभ नहीं उठा सकते हैं: 👉5 एकड़ से ज़्यादा कृषि भूमि के स्वामी परिवार। 1000 वर्ग फीट से ज़्यादा का घर। 👉अधिसूचित नगरपालिका क्षेत्र में 100 गज से ज़्यादा का प्लॉट। 👉गैर-अधिसूचित नगरपालिका क्षेत्र में 200 गज से ज़्यादा का प्लॉट। जिन समुदायों को पहले से ही आरक्षण प्राप्त है, जैसे- अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, उन्हें भी इससे बाहर रखा गया है। 103वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2019 की संवैधानिकता— जनहित अभियान बनाम भारत संघ (2022) के मामले में मुख्य न्यायाधीश उदय उमेश ललित, न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी, न्यायमूर्ति एस. रवींद्र भट, न्यायमूर्ति बेला एम. त्रिवेदी, न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला की पाँच न्यायाधीशों की पीठ ने इस संशोधन की संवैधानिक वैधता को यथावत रखा। आरक्षण को 3:2 बहुमत से यथावत रखा गया। जबकि न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी, न्यायमूर्ति बेला त्रिवेदी एवं न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला ने 103वें संशोधन को यथावत रखा। न्यायमूर्ति रवींद्र भट ने अल्पमत की राय लिखी तथा मुख्य न्यायाधीश उदय उमेश ललित ने अल्पमत के दृष्टिकोण से सहमति जताई। OBC वर्ग ध्यान दें! भाजपा सरकार आपके हिस्से की कटौती का प्रबंध किस प्रकार किया हैं। पढ़ें और समझें!🙏
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मनुवादी चालाक कौम हैं देश के दलित पिछड़ों को कुछ समझ आता उससे पहले EWS लागू कर दिया, ग़रीब सभी वर्गों में है लेकिन फ़ायदा सिर्फ़ सुवर्ण उठा रहे हैं, यह वाकई शर्मनाक है, बिना संघर्ष बिना किसी आंदोलन के मनुवादियों ने लागू करवा लिया
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जब साल में 13 महीने, तो सैलरी 12 महीने की क्यों ?
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Stop everything that you are doing and watch this video carefully. If you are busy now, bookmark it and watch in the evening. In just 8 minutes, you'll understand how Lok Sabha elections was manipulated with crores of fake voters across the country. Even if you are a Modi supporter, this is your best opportunity to stand on the right side of history. True patriotism means seeking the truth, not hiding from it. Watch it, and decide for yourself. @RahulGandhi #VoteChoriBJP #BJPExposed
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आपके घरों में आज का अख़बार आया ही होगा। क्या आप अपने फोन से अच्छी तस्वीर लेकर अपलोड कर सकते हैं ? बताइये कि पहले पन्ने पर राहुल गांधी की प्रेस कांफ्रेंस की रिपोर्ट छपी है या नहीं। अगर भीतर के पन्ने पर छपी है तो उसकी भी तस्वीर अपलोड कीजिए। गोदी मीडिया लोकतंत्र का हत्यारा है। इन पर नज़र रखना आपकी सुरक्षा के लिए बहुत ज़रूरी है।
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चुनाव आयोग @ECISVEEP का कहना है कि सैंतीस साल पहले राजकमलदास एक ही साल में 11 बच्चों का पिता बना - इस बात पर तुम्हें यकीन नहीं है तो हलफनामा दो.
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