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सपा को बृजभूषण सिंह या क्षत्रिय नेताओं के माइंड गेम में नहीं फँसना चाहिए।
यूपी-बिहार के कुछ नेताओं का खेल देखिए, इनका एक ग्रुप होता है इनके लिए पार्टी मायने नहीं रखती है।
राजा भैया, धनंजय सिंह,अभय सिंह,बृजभूषण सिंह, राकेश सिंह, बृजेश सिंह आदि लोग
अपने ग्रुप के किसी को भाजपा में रखेंगे, किसी को सपा में, किसी को बसपा में, किसी को कांग्रेस में ।
मकसद ये कि सरकार किसी की भी आए, अपने आदमी के जरिए या पहले से सेट किए हुए डाकिये के द्वारा सिफारिश लगवाकर बचने का रास्ता खुला रहे।
इनका चैनल हर तरफ चालू रहना चाहिए, मलाई सरकार में खानी है। सपा को ऐसे खेल से सावधान रहना चाहिए।
इसलिए सरकार किसी की भी रहे इनका ठेके-पट्टों पर कब्जा रहता है और रिश्तेदारों को ठीक ठाक नौकरियों में सेट करते रहते हैं उनके लिए सरकार मायने नहीं रखती हर तरफ चैनल होता है इनका ..
और ये अपने समाज के अधिकारियों के साथ खुलकर समर्थन में होते हैं ट्रांसफर पोस्टिंग का खेल भी ये अपने हिसाब से खेल लेते हैं ।
अपना हाथ जगन्नाथ...
तुम भी वही सोच रहे जो मैं सोच रहा ?😄
अपना हाथ जगन्नाथ
ये हैं पूरी दुनिया के सबसे ताकतवर गृहमंत्री!
श्री @amitshah @officeofamitshah
सादगी और आत्मनिर्भरता देखिए
अपना काम खुद ही करने में विश्वास रखते हैं
जो काम जिन्ना और मुस्लिम लीग ने धर्म के नाम पर किया वही काम बीजेपी आज के दौर में कर रही है ...
देश को बांटना ही इनका मुख्य लक्ष्य है।
भाजपा के वीर "सावरकर" ने भी 1937 में हिंदू और मुसलमानों को दो अलग राष्ट्र बताया था।
आज भाजपा और संघ के लोग उन्हीं सावरकर को देशभक्ति का सबसे बड़ा चेहरा बनाकर पेश करते हैं।
सत्ता के लिए हिंदू महासभा ने मुस्लिम लीग के साथ मिलकर सरकारें चलाईं। कश्मीर में भी भाजपा ने सत्ता के लिए महबूबा मुफ्ती की पीडीपी के साथ सरकार बनाई।
इनको राष्ट्र से मतलब ही नहीं था/ है ... इनको सिर्फ सत्ता से मतलब था/है
आज भी वही खेल चल रहा है। पहले हिंदू-मुसलमान के नाम पर लड़ाओ, फिर हिंदुओं में ही ब्राह्मण-ठाकुर, बनिया-जाट, गुर्जर-यादव, कुर्मी-मौर्य, सैनी-लोध, जाटव-पासी और न जाने कितनी जातियों के नाम पर आपस में भिड़ाओ।
फिर बोलो की तुम नीच जाति के हो .. वो ऊँची जाति के हैं .. हिंदुओं में सबसे बड़ी खाई पैदा करने वाले यही हैं।
इनका काम ही लोगों को उलझाए रखना है। कभी मंदिर-मस्जिद, कभी हिंदू-मुसलमान, कभी जातियों का झगड़ा।
Breaking News - दुलारचंद यादव हत्याकांड में अनंत सिंह को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। अंतरिम जमानत बढ़ाने की मांग ठुकरा दी गई है और 1 दिसंबर तक सरेंडर करने का आदेश दिया गया है।
आरक्षण विरोधी लोग आरक्षण का नाम आते ही 30 नंबर पाने वाले के डॉक्टर बनने से लेकर न जाने कितने कुतर्क गिनाने लगते हो.. (जबकि कटऑफ कुछ और ही कहता है )
लेकिन कभी यह भी बताओ कि सदियों तक शिक्षा, और अन्य संसाधनों पर एकाधिकार रहने के बावजूद समाज और देश के लिए ऐसी कौन-सी खोज या तकनीक विकसित की गई, जिसका लाभ अपने देश को हुआ है माचिस की तीली और सुई तक नहीं बना सके ।
उसके बदले समाज को जाति, छुआछूत, ऊँच-नीच और भेदभाव में बाँटने वाली व्यवस्था जरूर मजबूत की गई।
Manav Yadav retweeted
Replying to @grok
@grok कुमार विश्वास की सबसे प्रचलित कविता जिसके लिरिक्स मैंने नीचे दिए है। इसमें कितने शब्द उर्दू अरेबिक है, सारे बताओ और बताओ इस कविता में कितने प्रतिशत साहित्यिक हिंदी है।
आदरणीय युगकवि @DrKumarVishwas जी,
कुछ तथाकथित साहित्यिक पुरोधाओं और आलोचकों की असहजता का मूल कारण संभवतः यही है कि आपने हिंदी साहित्य को सीमित सभागारों और अभिजात्य विमर्शों से निकालकर वैश्विक परिदृश्य में एक सशक्त सांस्कृतिक ब्रांड के रूप में प्रतिष्ठित कर दिया।
आपकी लोकप्रियता ने सिद्ध किया है कि हिंदी केवल अभिव्यक्ति की भाषा नहीं, विश्वमंच पर भारतीय अस्मिता का गौरवपूर्ण उद्घोष भी है।
श्री @ajeetbharti जी और @manojmuntashir सहित समस्त आलोचकों से एक प्रश्न है—क्या किसी कवि की वैश्विक स्वीकार्यता उसका अपराध है?
साहित्य में प्रतिष्ठा ईर्ष्या से नहीं, सृजन और साधना से अर्जित होती है।
सादर प्रणाम! 🙏
पुष्पक विमान भी खोज लिए थे, जिसकी तकनीक आज तक नासा वालों को नहीं मिली।
गौमूत्र का सेवन भी शायद उसी वैज्ञानिक क्रांति का हिस्सा रहा होगा। और हाँ, इंसानों को जातियों में बाँटकर ऊँच-नीच का इंतज़ाम भी इसी महान खोज-सूची में जोड़ दीजिए।
अगली पोस्ट में टाइम मशीन और चाँद पर प्लॉट की रजिस्ट्री का इंतज़ार रहेगा।
वैदिक काल,
1500 ईसा पूर्व से 600 ईसा पूर्व तक था,
ब्राह्मणों ने इस समय अनेको खोज किए।
दुनिया को ज्ञान भी दिए,
वैदिक काल को 2 भागों में बांट दिया गया है।
ऋग्वेदिक काल और उतरवैदिक काल,
ब्राह्मणों ने ऋग्वेदिक काल मे अनेको खोज किए।
कृषि करना शुरू किए
धातुओ का ज्ञान हुआ
संगीत और मंत्र का ज्ञान
चिकित्सा का ज्ञान ये सब ब्राह्मणों ने खोज किए थे,
उतरवैदिक काल मे भी ब्राह्मणों ने बहुत सारी चीजों का खोज किया था अगले पोस्ट मे उसे मेंशन करूंगा।
MLC चुनाव के नतीजों के बाद राजभर और संजय निषाद को भी सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जी की याद आने लगी है।
सुना है, अब उनसे संपर्क साधने की जुगत भिड़ाई जा रही है।
खैर अध्यक्ष जी को ऐसे लोगों से एलायंस करने से बचना चाहिए ।
ब्राह्मणों के हर चुनाव से पहले नाराज़ होने की पूरी क्रोनोलॉजी समझाता हूँ...आपको
दरअसल, ब्राह्मण समाज का एक वर्ग हर सरकार और हर पार्टी पर यह मानसिक दबाव बनाने की कोशिश करता है कि सत्ता में उनकी वजह से ही सरकार आई है।
मायावती जी की सरकार रही हो, अखिलेश जी की या केंद्र में मोदी सरकार, हर दौर में यही कहानी देखने को मिलती है।
और ये हर चुनाव के दो तीन महीने पहले ही नाराज होते हैं।
अगर विश्वास न हो तो मीडिया की हेडलाइंस देख लो हर चुनाव के पहले।
आप गूगल करके देख लीजिए, 2007, 2012, 2014, 2017, 2019, 2022 और 2024… लगभग हर चुनाव से पहले मीडिया में बड़ी-बड़ी हेडलाइन चलने लगती हैं कि ब्राह्मण समाज नाराज़ है।
पूरा मीडिया जगत इस नाराज़गी को ऐसे दिखाता है, जैसे चुनाव के नतीजा के केंद्र में ब्राह्मण समाज ही है।
दरअसल, ये एक चाल होती है ।
चुनाव से पहले नाराज़गी दिखाकर हर पार्टी को यह एहसास कराया जाता है कि ब्राह्मण समाज उसके साथ नहीं आया तो सत्ता मिलना मुश्किल हो जाएगा।
और अगर किसी दूसरी पार्टी की सरकार बन गई, तो यही कहा जाएगा कि हम तो पिछली सरकार से नाराज़ थे, इसलिए आपकी सरकार बनवाने में हमारी बड़ी भूमिका रही।
यही वजह है कि सरकार चाहे किसी की भी बने,
मीडिया या मानसिक रूप से सबको लगता है कि ब्राह्मणों की वजह से ही सरकार बनी है।
2007 में मायावती जी की सरकार बनने पर भी यही खेल खेला गया था।
लेकिन अब हर समाज और हर पार्टी धीरे धीरे इस बात को समझने लगी है कि ये भाजपा को छोड़कर किसी को आधा वोट भी नहीं देंगे तो इनके पीछे समय बर्बाद करने से अच्छा है कि ओबीसी sc St समाज पर फोकस किया जाए।
गरीब आदमी दो कमरे बनवाने में पूरी जिंदगी खपा देता है, यहां अफसरों के 40 विला-कॉटेज की खबर आ रही है।
ये दोनों पति-पत्नी राजस्थान में ही पोस्टेड हैं इनके पास हजारों करोड़ की संपत्ति निकल के आ रही है।
दरअसल अपने देश में अधिकारियों लेवल पर भी इतनी असमानता है कि कांटस्टेबल अपने बच्चों की फीस भरने और खर्चे ढंग से नहीं चला पाता और ये जो IAS-IPS होते हैं इनके पास इतना धन होता है ये खाते खाते उल्टी तक कर देते हैं और छिपाने से भी नहीं छिपता है ।
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अपने यहां रोड पर साउथ फिल्मों की तरह यह वाला एक्सक्लूसिव स्टंट रोज होता रहता है।
अपने देशवासियों में निम्न कारकों की कमी पाई जाती है।
सिविक सेंस
रोड सेफ्टी रूल
माइकल शूमाकर बनने की लालसा (इसकी अधिकता पाई जाती है)
Manav Yadav retweeted
"हिंदी में आपकी एक्टिंग को उतना रिकग्निशन नहीं मिला" के जवाब में पूजा हेगडे का कहना है कि हिंदी ऑडियंस मुझे गाने के लिए जानती है।
यदि मेरी एक्टिंग देखनी है तो उन्हें साउथ की कुछ फिल्में देखनी चाहिए क्योंकि हिंदी में उतनी एक्टिंग मेरी निखर कर नहीं आ पाई।
पूजा हेगड़े का कहना है कि मेरी एक्टिंग के लिए हिंदी दर्शकों को मेरी राधेश्याम मूवी जरूर देखनी चाहिए। इसे मैं पर्सनली रिकमेंड करती हूं।
एक बात सच है कि जो एक्ट्रेस साउथ फिल्मों में बहुत अच्छा करती है वह हिंदी फिल्मों में आकर उसे तरह का परफॉर्म नहीं कर पाती है।
आपको इसकी सबसे बड़ी वजह क्या लगती है, हिंदी की फिल्मों में आखिर ऐसा क्या है कि साउथ की अच्छी एक्ट्रेस भी यहां पर एवरेज बनकर रह जाती है?
Manav Yadav retweeted
पल भर के माइक्रो हिस्से में बहुत कुछ टूट गया, जो दिखाई तो नहीं देगा बस महसूस होगा।
सपने, उम्मीदें और हौसला जब एक साथ टूट जाता है तो आंखों में नमी आ जाती है।
टेक्नोलॉजी जब हमारे समाज में दाखिल होती है तब वह सबसे निचले तबके के हाथों के किस्मत की लकीरों को मिटा देती है।
हम पूंजीवाद साम्यवाद समाजवाद के द्वंद में फंसे रह जाएंगे एक व्यक्ति जो अपने पैरों पर चल सकता है, अब शायद उसके पैर जवाब दे जाएं....
वाराणसी में सपा ने भाजपा की हवा टाइट कर दी है ये खीझ कर रिकाउंटिंग करवा रहे ....
स्नातक MLC की प्रथम वरीयता के 9 चक्र पूरे हो चुके हैं। सपा के आशुतोष सिन्हा को 50,462 वोट मिले हैं, जबकि भाजपा के केदार सिंह 33,472 पर हैं।
सीधा 16,990 वोट का अंतर है जितना फड़फड़ाना हो फड़फड़ा लो जीत तो नहीं पाओगे ।
रिकाउंटिंग तो गोरखपुर का भी होना चाहिए था खैर ...
सोचिए, प्रांजल यादव जी पर भाजपा वाले किस तरह सरासर झूठे आरोप लगा रहे हैं।
लेकिन इसके पीछे की Chronology भी समझिए।
ये सिर्फ आज का मामला नहीं है, भविष्य के चुनावों की जमीन तैयार करने का तरीका है...
अभी से झूठ फैलाकर माहौल बनाया जाएगा कि यादव अधिकारी तो सपा का आदमी था।
फिर भविष्य में जब किसी चुनाव में PDA से जुड़े अधिकारी की तैनाती का सवाल आएगा, तो इसी नैरेटिव का इस्तेमाल करके उसे चुनाव आब्जर्वर, रिटर्निंग ऑफिसर या दूसरी चुनावी जिम्मेदारियों से दूर रखा जाएगा ।
और ये बात 2027 के लिए अभी बुकमार्क करके रख लेना ।
Manav Yadav retweeted
ये स्नातक और शिक्षक जनता नहीं हैं क्या 🤔
बनारस के आस-पास के नेताओं से विनम्र निवेदन है कि .. बनारस के लिए कूच कर दो ।
@yadavakhilesh
@RajeevRai
@MPDharmendraYdv
@imluckyyadavsp
री-काउंटिंग या पुनः मतगणना कराके भी वाराणसी प्रशासन कुछ भी हासिल नहीं कर पायेगा क्योंकि पीडीए प्रहरी सजग हैं और हमारे अन्य कार्यकर्ता, नेतागण व निष्पक्ष चुनाव चाहनेवाले युवा और लोकतंत्र के शुभचिंतक हज़ारों की संख्या में आसपास के शहरों से अपने साथियों के लिए खाना-पानी लेकर मतगणना केंद्र की ओर बढ़ रहे हैं।
नाइंसाफ़ी इतनी भी नहीं होनी चाहिए कि लोग नैतिकता की सीमाएं तोड़ने पर मजबूर हो जाएं।
पीडीए प्रहरियों से पुन: पुनः हमारी अपील है कि ‘जब तक जीत का प्रमाण नहीं, तब तक विश्राम नहीं।’
@ceoup
@ECISVEEP
@SpokespersonECI


























