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मेरीगंज में बारहों बरन के लोग रहते हैं लेकिन अहीर टोली में आज समय से पहले अनहरिया हो गया है। जोतखी जी अभी भी खेलावन यादव के दुआर पर इकलौते बचे हैं। बाक़ी लोग तो दुपहर में ही उठकर चले गए थे। आज का रिजल्ट देखकर खेलावन का बल आधा रह गया है। दरवाजे पर ज़िंदाबाघ-मुर्दाबाघ का नारा लगा रहे लड़के , दरवाज़ा बन्द करके रील देखने लगे हैं।
अंतिम चाय का कप जिसमे न चीनी महसूस हुआ ना दूध….उस का आख़िरी घूँट उड़ेलकर , उन्होंने खेलावन यादव को देखा। माथा में नवरत्न तेल ढाँप के खेलावन ऐसे निश्चेष्ट पड़े हैं , जैसे बीवी हरवाह के साथ भाग गई हो।
जोतखी काका को घर जाना है पर उनकी समस्या है कि उन्हें बाभनटोली पहुँचने से पहले कैथ टोली , कुर्मी टोली , पासवान टोली फिर राजपूत टोली से होकर गुजरना पड़ेगा। हर जगह अलग सीन होगा।
उन्होंने घर की तरफ़ कदम बढ़ाया कैथ टोली में सन्नाटा पसरा हुआ था। तहसीलदार विश्वनाथ प्रसाद की हवेली अब खंडहर हो चुकी थी। डॉक्टर प्रशांत और उनकी बिटिया अब यहाँ नहीं आते। पूरा टोली के तीन चार घरों में ही लाइट जल रही थी। एक दरवाजे पर शिवलोचन सिरबासत्व सिंगल मर्द मिले। यमराज ने इनका टिकट काटा तो कैथटोली ख़त्म हो जाएगी।
कुर्मी टोली में जश्न चल रहा था। छोटे बच्चे पटाखा फोड़ रहे थे। कुछ नवयुवको ने मदिरा भी सेवन किया हुआ था। तबतक उनका भूतपूर्व चेला मंटुआ दिख गया , नजर मिलते ही उसने पैलगी की और लड्डू मंगाया। अजब उत्साह में था आज। और दिन होता तो जोतखी काका लड्डू दाबने में देरी नहीं करते। पर आज उन्होंने सुगर का बहाना बनाना चाहा तबतक वहीं खड़ी मंटुआ की माई से टोन कसी …..ख़ालीऽ पंडीजी….ख़ाली अहीरे के चाय में विटामिन नईखे….कुर्मियों के लड्डू में बा।
मामला जोतखी काका ने दाँत निपोरा और झट्ट से रसगुल्ला दाबकर आगे बढ़ गए। नेपथ्य में कहीं से रील की आवाज आ रही थी….केहू के ना बात चली ,कुर्मियाने के राज चलीऽ।
वह पासवान टोली आ पहुँचे, यहाँ सदाव्रत DJ चलता है। किसी का बच्चा हो तो भी DJ, किसी के यहाँ मरनी हो तो भी डीजे….आज भी डीजे बज रहा प्रखंड हो या जिला पासवाने से हिला….। रामबचन हाज़रा के लड़के मदिरा में मस्त है , उसने जोतखी काका देखकर कहा ए बाबाऽ ….ऊपर आसमान नीचे पासमान….। मुंडी हिलाकर जोतखी जी आगे बढ़ गए।
राजपूत टोली के एंट्री पर ही रामकिरपाल सिंघ मिल गए। उनका पोता बुलेट का साइलेंसर खोलकर पटाखा बजाता हुआ निकला था। पैना लिए रामकिरपाल उसके इंतजार में खड़े थे। परनामा-पाती के बाद जोतखी जी ने कहना चाहा कि बाबूसाहेब वोट चोरी त भइल बाऽ। तबतक दलान पर टंगा भाजपा का झंडा दिख गया। पिछले बार यहाँ लालटेम का झंडा था। रामकिरपाल सिंघ जोतिखी जी की दृष्टि भाँप गए और क्लियर किया इसबार कुँआ में पानी भरना था। इसलिए झंडा बदल गया है।
जोतखी जी चलने को हुए तबतक जूनियर रामकिरपाल लौट आए और सीनियर रामकृपाल उनपर टूट पड़े। उत्सव के बीच रुदन के चीत्कार ने वातावरण में विद्रूप श्रृंगार भर दिया। सब लोग जुट गए और कम्यूनल बातें होने लगी। जोतखी जी वहाँ से निकल गए।
अब अंतिम बारी बाभनटोली की थी। जो आज अपना होकर भी ग़ैर होने का भाव देती थी। पाँव दबा कर जोतिखी जी दस कदम चले ही होंगे कि ऊँचे चबूतरे पर खड़े संजय झा ने ज़ोर से ख़खारा….जोतखी जी को मालूम है कि यह ख़ख़ार नहीं तंज है, ख़खार सुनके रामबचन मिसिर ने भी कुटिल मुस्कान छोड़ दी है। जोतिखी जी अंदर से तिलमिला गए। आज सुबह तक जनसुराजी रहे इंसान के मुख पर यह कुटिल मुस्कान बिल्कुल नहीं सुहा रही परंतु समाज ही कम्यूनल हो गया है तो जोतिखी जी क्या करें। उन्होंने घर पहुंचते ही अपना राज्यसभाई सदरी उतारा और खूँटी पर टाँग दिया । पता नहीं अगली बार बासे चढ़ेगा या नहीं।
-मैला आँचल से कल शाम का एक दृश्य
That’s the exact opposite of what’s actually happening.
What Shah has hinted or asked for today in Uttar Pradesh should be decoded like this: Please give one more term to Modi in 2029 and he will not disturb Yogi in 2027 !
Is this a call for truce or something else? Will the other camp accept this positively?
This is clear that Shah has accepted upper hand of Yogi in the ticket distribution in the upcoming assembly elections which anyway Shah cannot control with a different kind of national BJP president.
The internal churning in the BJP and the country are forcing team Modi to duck. Let’s wait and watch.
#AmitShah #UttarPradesh #yogiadityanath
राजद जब-जब कमजोर होती है , सवर्ण उसे सहारा देते हैं। 2009-10 काल में जब राजद अपनी बुरी स्तिथि में थी तब लालू के अलावा तीन सांसद राजपूत थे। जगदानंद सिंह , रघुवंश सिंह , उमाशंकर सिंह।
फिर राजद का विचारक सब सवर्ण मुक्त संसद का नारा देने लगा।
अभी फिर से राजद वैसे ही स्तिथि में है तो दो सवर्ण उसके टिकट पर जीतकर आए हैं।
अभी फिर से पौधे में जान आने दीजिए। इसकी कमान वापस बहुजन कोकिला प्रियंका भारती, आरा की अनार और जौनपुर की कंचना ही संभालेगी।
काशीनाथ सिंह ने लिखा है ठाकुर बुद्धि अहीर बल , झंडू हो गया जनता दल।
एक राजेश सल्फेट है जो सॉफ्टवेयर की गलती को जाति से जोड़कर व्याकुल होने की एक्टिंग कर रहा है। एक संजय दर-सल्फेट है जो उसे ऐम्प्लीफ़ाई करके इंटेलेक्चुअल दिखने का कोशिश कर रहा है।
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स्त्रियों की सबसे बड़ी दुश्मन स्त्री ही है जिस दिन स्त्रियां ये बात समझ जाएंगी उसी दिन उनका भला हो जाएगा ...अभी कलकत्ता से वो वीडियो आया था एक परिवार का तो स्त्रियाँ ही टिप्पणी कर रही थी कि ये औरत इस आदमी के साथ कैसे है
बग़ैर आपद काल के गृहस्थी में खाना बनाने वाले, बच्चों को नहलाने-धुलने वाले, ससुराल में समय गुजारने वाले, अपने फ़ैमिली के ऊपर ससुराल को डिसिशन मेकिंग में प्रीफ़ेंस देने वाले मर्द।
मर्दों के वर्गीकरण में सदैव अन्त्यज रहेंगे।
अनचेक्ड फेमिनिज्म ने समाज को उस पॉइंट पे पहुँचा दिया है जहाँ उसे मर्दों जैसा मर्द पसंद नहीं आ रहा है।
अब एक आदर्श मर्द की मुख्य प्रॉपर्टी फेमिनाइन होना हो गया है।
शास्त्रीय संगीत- ब्राह्मण
70s-80s संगीत- क्षत्रिय
पोस्ट 2000 संगीत - वैश्य
90s संगीत- शुद्र
AI संगीत - अंत्यज
Sauth andiaa saar , wee are diphraant saar
ಬೆಂಗಳೂರಿನ ಐಟಿ ಕಂಪನಿಗಳಲ್ಲಿ ಕನ್ನಡಿಗರಿಗೆ ಉದ್ಯೋಗಾವಕಾಶಗಳಲ್ಲಿ ಅನ್ಯಾಯವಾಗುತ್ತಿದೆ ಎಂಬ ದೂರುಗಳು ಕೇಳಿಬರುತ್ತಿರುವುದು ವಿಷಾದನೀಯ. ಕನ್ನಡ ಮಾತೃಭಾಷೆ ಇರುವವರನ್ನು ಕಡೆಗಣಿಸಲಾಗುತ್ತಿದೆ ಎಂಬ ವಿಷಯವನ್ನು ಸರ್ಕಾರ ಗಂಭೀರವಾಗಿ ಪರಿಗಣಿಸಿದೆ.
ಕರ್ನಾಟಕದಲ್ಲಿ ಕನ್ನಡಿಗನೇ ಸಾರ್ವಭೌಮ. ಕನ್ನಡಿಗರ ಹಕ್ಕು, ಗೌರವ ಮತ್ತು ಅವಕಾಶಗಳನ್ನು ಯಾವುದೇ ಕಾರಣಕ್ಕೂ ಕಡೆಗಣಿಸಲು ಸರ್ಕಾರ ಅವಕಾಶ ನೀಡುವುದಿಲ್ಲ. ಜಗತ್ತು ಬೆಂಗಳೂರನ್ನು ಭಾರತದ ತಂತ್ರಜ್ಞಾನ ರಾಜಧಾನಿಯಾಗಿ ನೋಡುತ್ತಿದ್ದು, ನಮ್ಮ ಕನ್ನಡಿಗರ ಪ್ರತಿಭೆ, ಕೌಶಲ್ಯ ಮತ್ತು ಸಾಮರ್ಥ್ಯದ ಬಗ್ಗೆ ನಮಗೆ ಅಪಾರ ಹೆಮ್ಮೆಯಿದೆ.
ಕನ್ನಡಿಗರನ್ನು ಯಾವುದೇ ಖಾಸಗಿ ಸಂಸ್ಥೆ ಉದ್ದೇಶಪೂರ್ವಕವಾಗಿ ಕಡೆಗಣಿಸಿರುವುದು ಕಂಡುಬಂದರೆ, ಸರ್ಕಾರ ಸೂಕ್ತ ಕ್ರಮ ಕೈಗೊಳ್ಳಲಿದೆ. ಕನ್ನಡಿಗರ ಹಿತಾಸಕ್ತಿಗೆ ಧ್ವನಿಯಾಗಿ, ಅವರ ಸಮಸ್ಯೆಗಳಿಗೆ ಸ್ಪಂದಿಸಲು ಸರ್ಕಾರ ಸದಾ ಬದ್ಧವಾಗಿದೆ.
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ये पप्पू मीडिया का LDचट्टा तो मुझे पहले ही ब्लॉक कर रखा है लेकिन आज इसका एक पोस्ट देखिए।
ये कोठरी वाले क्रांतिकारी पत्रकारिता के नाम पर दूसरे लोगों को #गोदी_मीडिया का सर्टिफिकेट बांटते हैं।
आज सम्मान किसी पत्रकारिता के लिए नहीं बल्कि #अमितशाह मुर्दाबाद के नारे लगाने और देश में झूठी कहानियां गड़ कर अराजकता फैलाने के लिए मिलने लगा है। जिस श्याम नाम के वामपंथी को ये सम्मान मिला है उसका नैरेटिव किसने नहीं देखा हैं।
कैसे एक मुस्लिम समाज के युवक को हिंदू बता कर उसको अपमनित कर रहा था और सरकार के खिलाफ सोशल मडिया पर जहर फैला रहा था। इस राक्षस को कोर्ट ने कैसे बेइज्जत किया था। अंजुम और उसका गुंडा टोली भूल जाएगा लेकिन जनता है सब जानती हैं।
इसे सम्मान नहीं #दलाली का सर्टिफिकेट बोलते हैं जो कोठरी के लिए रखैल वाली पत्रकारिता करने के लिए सम्मान पूर्वक मिला हैं।
जय लोकतंत्र 🙏
भाई ने हरियाणवी एप्स्टीन फाइल्स खोल रखा है TL पे
रुचिका गहरोत्रा 14 वर्षीय टेनिस खिलाड़ी थी।अपनी सहेली आराधना के साथ प्रैक्टिस करने गई थी।उस समय टेनिस एसोसिएशन के अध्यक्ष आईपीएस अधिकारी एसपीएस राठौड़ ने उन्हें देखा तो अपने रूम में बुलाया।आराधना को एसपीएस राठौड़ ने ये कहकर बाहर भेज दिया की जाओ कोच को बुलाकर लाओ।वो अकेली रुचिका के पास आया और उसका हाथ पकड़ कर खींच लिया और छेड़ छाड़ करने लगा।रुचिका चिल्लायी तो उसकी सहेली आराधना आई और उसने भी ये सब देखा।एसपीएस राठौड़ ने उनको धमकाया की किसी को बताया तो बहुत बुरा होगा।लेकिन रुचिका,उसकी सहेली और उनके परिवार ने हिम्मत दिखायी और पुलिस में कंप्लेंट दे दी।उस कंप्लेंट पर तो कोई एक्शन हुआ नहीं उल्टा रुचिका के भाई पर चोरी के झूठे मुकदमे लगा दिए गए और थर्ड डिग्री टार्चर किया गया।उसके भाई को नंगा करके उसके घर के आगे से लेकर जाते ताकि रुचिका टूट जाये।पुलिस वाले सिंपल ड्रेस में रुचिका के घर जाते।धमका कर आते।उसको स्कूल से निकलवा दिया।टेनिस पे रोक लगवा दी।रुचिका डिप्रेशन में चली गई और एक दिन उसने अपनी जान दे दी।उस समय की कांग्रेस और चौटाला सरकारों ने राठौड़ के ख़िलाफ़ कोई कार्यवाही तो छोड़ो उसे प्रमोशंस दी।उसे डीजीपी तक बना दिया।लेकिन परिवार क़ानूनी लड़ाई लड़ता रहा और 2008 में राठौड़ को कोर्ट से सजा करवायी।उस समय की सरकारें लोकतांत्रिक सरकारें थे और अब तानाशाही चल रही है।
and where did the dreams go
endless fields of barley
silver lining cutlery
a house having curtains
of all shades of blue.
where did my words go
sunshine through your arms
each month january
no debts to pay for,
all bags empty.
where did your smile go
all the ways of infidelity
slow grasping of loud jokes
sweet laughter and sweeter
pain
where did memories go
if not underneath the bed
under the skin
under the wet soil
बहुजनवादी सम्राट अशोक के पोते पर फिर से एकबार ब्राह्मणवादी सम्राट पुष्यमित्र के पोते ने हमला किया है।
पिछले दो हज़ार सालों में कुछ भी नहीं बदला।
राजकुमार भाटी, समाजवादी पार्टी में अपनी औकात देख लो। और हाँ, अब मुँह बंद रखना, वरना वह कहावत सुनी है ना—धोबी का @@## न घर के रहोगे, न घाट के। 🤣🤣
@rajkumarbhatisp
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राष्ट्र की आधुनिक अवधारणा भले ही नई हो, लेकिन समान देवताओं और साझा संस्कृति के सूत्र ने राजनीतिक सीमाओं से परे सदियों से हमें एक सांस्कृतिक पहचान में बाँधे रखा है।
काल के चक्र में भूभाग घटते रहे, बढ़ते रहे, राजनीतिक सीमाएँ बदलती रहीं, लेकिन अपनी संस्कृति और सभ्यता की रक्षा के लिए यह मिट्टी सदैव ऐसे पुरुषार्थियों को जन्म देती रही है, जिन्होंने अकेले अपने पुरुषार्थ से काल का रथ मोड़ दिया।
स्वतंत्र भारत की लोकतांत्रिक राजनीति में कांग्रेस सदैव सत्ता की डिफॉल्ट दावेदार मानी जाती रही। राजनीतिक विश्लेषकों का एक वर्ग मानता रहा है कि इस देश के लोगों का राजनीतिक मिज़ाज मूलतः कांग्रेसी है। इसीलिए कांग्रेस सत्ता में रहे या न रहे, देश की नीतियाँ अंततः कांग्रेस की विचारधारा के अनुरूप ही बनेंगी।
मगर भारत माता ने एक बार पुनः ऐसे लाल को जन्म दिया, जिन्होंने अपने पुरुषार्थ और अपनी वैचारिक स्पष्टता से महज़ एक दशक में भारतीय राजनीति को लेफ्ट ऑफ़ सेंटर से राइट ऑफ़ सेंटर में पहुँचा दिया।
चाहे राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए भाजपा को विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बनाना हो या भाजपा की वैचारिक स्वीकार्यता को नए वर्गों तक पहुँचाना हो, आदरणीय अमित शाह जी ने राजनीतिक संभावनाओं की हर लिमिट को उसके मैक्सिमम तक पहुँचाकर दिखाया है।
और यही पुरुषार्थ सरकार में भी दिखाई देता है। चाहे राष्ट्र के दशकों पुराने स्वप्न को साकार करते हुए आर्टिकल 370 हटाना हो, CAA लागू करना हो या भारत को अपनी न्याय संहिता देना हो, उन्होंने हर बड़े संकल्प को निर्णायक परिणाम तक पहुँचाया है।
भारत के भविष्य को सुरक्षित रखने और सुदृढ़ भारत के संकल्प को साकार करने के लिए वे बड़े से बड़ा रिस्क लेने से भी नहीं हिचकते हैं।
कोई नेता विजनरी हो सकता है, कोई दूसरा नेता ज़मीनी स्तर पर कार्य करने में कुशल हो सकता है। मगर आदरणीय अमित शाह जी ऐसे विरले नेता हैं, जो विजनरी होने के साथ-साथ अपने विचारों को ज़मीन पर इंप्लीमेंट करके दिखाने में भी विश्वास रखते हैं।
मेरा यह दावा नहीं, बल्कि पूर्ण विश्वास है कि भारत जब विकास की अपनी अगली मंज़िलें तय कर चुका होगा और विकसित भारत की आने वाली पीढ़ियाँ उनके कार्यों का ऐतिहासिक मूल्यांकन करेंगी, तो उन्हें मेज़िनी और बिस्मार्क से कम नहीं पाएँगी।
आदरणीय गृहमंत्री @AmitShah जी जन्मदिवस पर आपको हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएँ।
माँ भारती आपको दीर्घायु, अक्षय ऊर्जा, अटूट संकल्प और अजेय पुरुषार्थ का आशीर्वाद प्रदान करें। राष्ट्र के प्रति आपका समर्पण और संकल्प इसी प्रखरता के साथ भारत की नियति को नई दिशा देते रहें।
क्योंकि भारत की उत्कर्ष-यात्रा में अभी अनेक शिखर शेष हैं, अनेक ऐतिहासिक संकल्प अधूरे हैं और अनेक स्वर्णिम अध्याय लिखे जाने बाकी हैं।
यह वैसा ही केस है जिसमें सौरव दास दूसरों के बाप को अनपढ़ , कामचोर , लुटेरा, डकैत बोल सकता है।
लेकिन दूसरे सौरव दास के बाप के बारे में कुछ नहीं बोल सकते क्योंकि उन्हें सौरव दास का बाप कौन है यह पता ही नहीं।
ये ब्राह्मणों के बारे में कुछ भी लिख सकता है क्योंकि सबको ब्राह्मण जाति का इतिहास पता है।
ब्राह्मण इसके बारे में कुछ नहीं लिखे सकते क्योंकि इसके जाति का कहीं कोई इतिहास नहीं है।
जिनकी ये पूजा कर रहे है, ये एक भी हथियार ना ब्राह्मणों ने बनाया और ना ही किसी भारतीय ने बनाया। 🙂
राइफल का आविष्कार 15वीं शताब्दी के अंत में जर्मनी में हुआ, जहाँ गैस्पार्ड कोलनर जैसे बंदूकसाज़ों ने बैरल में सर्पिल खांचे बनाए। पिस्टल 16वीं शताब्दी में यूरोप में विकसित हुई, जिसका नाम संभवतः इटली के पिस्तोइया शहर से जुड़ा है। रिवॉल्वर को व्यावहारिक रूप में सैमुअल कोल्ट ने 1836 में पेटेंट कराया, जिससे कई गोलियाँ बिना रीलोड किए चलाई जा सकीं। ये तीनों हथियार चीन में गनपाउडर की खोज के बाद धीरे-धीरे विकसित हुए।
इनको पूजा करनी है, जो शास्त्रों में यज्ञ से आहुति देकर दिव्यास्त्र प्राप्त करते थे, उनको यज्ञ से निकालकर पूजा करें तो वो दैवीय और पूज्यनीय लगेगा। 🙂
ब्राह्मणों को अपने यज्ञ से कुछ आग्नेयास्त्र, दिव्यास्त्र, अमोघ शक्ति, रथ, कवच निकालकर उनकी पूजा करनी चाहिए। तो हम सब भी प्रभावित हो, क्या शक्तियां है।
ये विदेशी वैज्ञानिकों और लोगो के फैक्ट्रियों में बनाये हथियार पूजकर क्या ड्रामे कर रहे है 🤷♂️🙂























